प्रवासी गुजराती पर्व: ‘मेरे पिता 15 घंटे काम करते थे…’, इरफान पठान ने सुन… – भारत संपर्क

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प्रवासी गुजराती पर्व: ‘मेरे पिता 15 घंटे काम करते थे…’, इरफान पठान ने सुन… – भारत संपर्क

इरफान पठान और दीपक पटेल ने सुनाई अपनी कहानी (फोटो: TV9)
टीवी9 नेटवर्क और एसोसिएशन ऑफ इंडियन अमेरिकन्स इन नॉर्थ अमेरिका (AIANA) द्वारा शनिवार को अहमदाबाद में प्रवासी गुजराती पर्व 2024 का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में फिल्मी दुनिया से लेकर राजनीति तक के दिग्गज शामिल हुए और साथ ही क्रिकेट को लेकर भी जमकर बातें हुईं. पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान और न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर दीपक पटेल ने यहां क्रिकेट वर्ल्ड में गुजरात के योगदान पर बात की.
टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान ने यहां कहा, ‘दुनियाभर में मौजूद गुजरात के लोगों ने हमारा नाम रोशन किया है, विदेश में गुजरात और भारत का नाम रोशन किया है. दुनिया में आप कहीं भी चले जाओ, वहां पर आपको गुजराती में मिलता ही है. कल को जब हम चांद पर भी जाएंगे, तो आपको वहां पर भी एक गुजराती जरूर मिल जाएगा.’
इरफान ने सुनाई संघर्ष की कहानी
इरफान पठान बोले कि क्रिकेट में पहले तो सिर्फ दिल्ली या मुंबई के लोग ही आते थे. हम बड़ौदा से निकलकर आगे बढ़े और दुनिया में नाम रोशन किया. आज आप देखेंगे कि हमारे घर में वर्ल्ड कप की दो ट्रॉफी हैं, पहले 2007 का टी-20 वर्ल्ड कप जीता और फिर 2011 का वनडे वर्ल्ड कप जीता है. आज गुजरात के ही जसप्रीत बुमराह आज दुनिया के नंबर-1 टेस्ट प्लेयर बने हैं और दुनिया उनसे सीख रही है.
अपने क्रिकेट करियर पर बात करते हुए इरफान ने कहा कि मेरे पिता मस्जिद में काम करते थे, उन्होंने हमारे परिवार को पाला. हम दोनों भाई क्रिकेटर बन गए और लगातार मेहनत के दमपर ही आज इस मुकाम तक पहुंच पाए हैं. इरफान ने युवाओं को टिप्स देते हुए कहा कि आप मेहनत करते रहो, भले ही फेल हो जाओ लेकिन मेहनत करेंगे तो उसका रिजल्ट मिलेगा ही. इरफान बोले कि मेरे पिता 15 घंटे काम करके सिर्फ 3500 कमाते थे, फिर भी हमको क्रिकेट खेलने से नहीं रोका.
गुजराती क्रिकेटर्स का किया गया सम्मान
‘विदेशी टीम में गुजराती क्रिकेटर होना मुश्किल है’
न्यूजीलैंड के लिए लंबे वक्त तक क्रिकेट खेलने वाले दीपक पटेल ने भी इस कार्यक्रम में शिरकत की. उन्होंने अपने अनुभव और एक बाहरी टीम में बतौर गुजराती खेलने के गर्व को भी बताया. दीपक पटेल बोले कि मैं गर्व से कहता हूं कि मैं गुजराती हूं, उन्होंने कहा कि जब मेरा पहला कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ तब उन्होंने यही कहा कि तुम जीवन में कुछ भी करो, लेकिन आपको हमेशा ये याद रखना है कि आप गुजराती हो.
दीपक पटेल बोले कि मैं 1987 के वर्ल्ड कप में खेला था, तब भारत के खिलाफ मैच हुए तो क्राउड में बस हर कोई यही पूछता था कि आपको गुजराती आती है या नहीं. उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि आप अगर भारतीय टीम में एक गुजराती हो तो आपको सम्मान मिलता है, लेकिन अगर आप किसी विदेशी टीम में एक गुजराती हो तब आपको कई चुनौती भी झेलनी पड़ती है, आपको अपमान भी झेलना पड़ता है ऐसे में अगर आप मुश्किलों से पार पाते हो तभी सफल हो सकते हो.

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