घर पर राम पताका, अयोध्या में दर्शन… बीजेपी में शामिल होने को लेकर क्या बो… – भारत संपर्क

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घर पर राम पताका, अयोध्या में दर्शन… बीजेपी में शामिल होने को लेकर क्या बो… – भारत संपर्क

कमलनाथ और नकुलनाथ (फाइल फोटो)
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ और उनके बेटे नकुलनाथ के बीजेपी में शामिल होने को लेकर चर्चाएं तेज हैं, जिसकी वजह से एमपी के छिंदवाड़ा से लेकर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली तक सियासी तापमान चढ़ा हुआ है. इस बीच कमलनाथ का बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि उनकी किसी भी पार्टी से बातचीत नहीं हुई है. वहीं, कांग्रेस नेता के घर पर राम पताका लगाई गई है.
कमलनाथ और नकुलनाथ दिल्ली में मौजूद हैं. इस दौरान उन्होंने बीजेपी में शामिल होने के सवाल को लेकर मीडिया से बातचीत में कहा कि मैंने कल कहा था कि अगर ऐसी कोई बात होगी तो मैं सूचित करूंगा. मेरी कहीं कोई बात नहीं हुई है. मैं तेरहवीं में जा रहा हूं. कमलनाथ के बयान के बाद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि मेरी कमलनाथ से चर्चा हुई है. कांग्रेस नेतृत्व की भी चर्चा हो रही है.
कमलनाथ को कांग्रेस में कौन सा पद नहीं मिला? दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कमलनाथ ने हमेशा कांग्रेस का साथ दिया है. उनको कौन सा पद नहीं मिला, सारे पद उन्हें मिले हैं. मुझे नहीं लगता वो पार्टी छोड़ेंगे. ED, CBI का दबाव सभी पर है. उन पर भी है, लेकिन कमलनाथ का चरित्र इस दबाव में आने वाला नहीं है.
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वहीं, बीजेपी में शामिल होने की अटकलों के बीच रामलला के दर्शन करने कमलनाथ और नकुलनाथ अयोध्या जाएंगे. कमलनाथ के करीबी का दावा है कि सोनिया गांधी से बातचीत के बाद भी राज्यसभा का टिकट नहीं मिला. अब कमलनाथ को लेकर ये जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि ये स्थिति कैसे बनी, आखिर ऐसा क्या हुआ कि जिसे इंदिरा गांधी तीसरा बेटा कहती थीं आज वो कांग्रेस पार्टी का दामन छोड़ने के तैयार हैं?
दिग्विजय सिंह से भी कमलनाथ की अनबन
दरअसल, नवंबर-दिसंबर में मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने कमलनाथ को मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया, लेकिन हार के अचानक उन्हें मध्य प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया. पार्टी के कार्यक्रमों से भी उन्होंने दूरी बना ली. कांग्रेस ने कमलनाथ को राज्यसभा के लिए भी उम्मीदवार नहीं बनाया, जिसके बाद कमलनाथ को लेकर बीजेपी में जाने की अटकलें तेज हो गईं. साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी कमलनाथ की अनबन की खबरें सामने आई थीं.
वहीं कमलनाथ के बीजेपी में शामिल होने को लेकर जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश से सवाल किए गए तो उनका क्या कहना था मैं बस यहां काशी विश्वनाथ की बात करता हूं, कमलनाथ की नहीं. उन्होंने काशी विश्वनाथ का जिक्र इसलिए किया क्योंकि कांग्रेस की भारत जोड़ो न्याय यात्रा बनारस में है.
मोदी लहर में भी छिंदवाड़ा का किला नहीं ढहा पाई बीजेपी
मध्य प्रदेश की जमीन कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करती थी, लेकिन पहले सुंदरलाल पटवा फिर बाबूलाल गौर और उसके बाद शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में मध्य प्रदेश की सियासत में धीरे-धीरे बीजेपी की पैठ बढ़ती चली गई. कांग्रेस का आधार खिसकता गया, लेकिन इसके बावजूद छिंदवाड़ा एक ऐसा कांग्रेस का किला था जिसे बीजेपी जीत नहीं पाई. साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश की 29 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की, लेकिन छिंदवाड़ा की सीट फिर से कांग्रेस का कब्जा रहा.
2014 के आम चुनाव को देखें तो बीजेपी को यहां 29 में से 27 सीटें मिली थीं. इस साल भी छिंदवाड़ा में बाजी कांग्रेस ने मारी. कमलनाथ यहां से जीतने में कामयाब रहे. कमलनाथ और छिंदवाड़ा का रिश्ता 4 दशक पुराना है. भले ही हाल के चुनावों में छिंदवाड़ा में भी कांग्रेस का वोट प्रतिशत गिरा हो, लेकिन मोदी लहर में भी कमलनाथ ने छिंदवाड़ा से कांग्रेस का हाथ मजबूत रखा है. अब कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के बीजेपी में जाने की अटकलें लग रही हैं. मध्य प्रदेश से पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया का बीजेपी में जाना और अब कमलनाथ को लेकर अटकलें कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है.

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