रायपुर की ‘तीसरी आंख’ को हुआ मोतियाबिंद… 100 से ज्यादा कैमरे बंद, आरोपियों की तलाश में पुलिस के छूटे पसीने

रायपुर की ‘तीसरी आंख’ को हुआ मोतियाबिंद… 100 से ज्यादा कैमरे बंद
HighLights
- आईटीएमएस के 100 से अधिक कैमरे बंद, अपराध जांच प्रभावित
- कंपनी का 8 करोड़ रुपये का भुगतान अटकने से मेंटेनेंस ठप
- जांच के लिए व्यापारियों और निजी कैमरों पर निर्भर पुलिस
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। राजधानी में अपराधियों की पहचान और वारदात के बाद उनके भागने का रास्ता तलाशने लगाए गए आईटीएमएस के कैमरे पुलिस के लिए ही परेशानी बन गए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों से लेकर आउटर क्षेत्रों तक लगे 100 से ज्यादा कैमरे बंद पड़े हैं। जो कैमरे चालू हैं, उनमें भी धुंधली तस्वीरें आ रही हैं। इससे लूट, डकैती, चोरी, छिनैती और हिट एंड रन जैसे मामलों की जांच प्रभावित हो रही है।
वारदात के बाद जब पुलिस इंटीग्रेटेड सिटी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (आईसीसीसी) से फुटेज खंगालती है तो कई कैमरों की स्क्रीन ब्लैक मिलती है। कुछ कैमरों में लेंस पर धूल और तकनीकी खराबी के कारण बदमाशों के चेहरे और वाहनों के नंबर स्पष्ट नहीं दिखते। इसके अलावा प्रमुख चौक के सिग्नलों का भी मेंटेनेंस नहीं हो पा रहा है।
कंपनी का आठ करोड़ भुगतान अटका, ठप हुआ मेंटेनेंस
राजधानी में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) का संचालन करने वाली एलएंडटी कंपनी का करीब आठ करोड़ का भुगतान अटका है। भुगतान न होने से कंपनी ने सिस्टम का मेंटेनेंस और संचालन बंद कर दिया है। इसके चलते शहर के 372 सीसीटीवी कैमरे और 36 ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन कैमरों की सर्विसिंग रुक गई है।
नतीजतन, कई महत्वपूर्ण स्थानों के कैमरे पूरी तरह बंद हैं और जो चालू हैं, उनका लेंस साफ न होने से फुटेज इतनी धुंधली है कि संदिग्धों की पहचान करना नामुमकिन हो रहा है।
अपराध अनुसंधान में आ रहीं ये प्रमुख दिक्कतें
- वाहनों के नंबर ट्रेस नहीं हो रहे: अपराध में इस्तेमाल गाड़ियों के नंबर रीड करने वाले 36 एएनपीआर कैमरे बंद पड़े हैं। इससे फर्जी या बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों से वारदात कर भागने वाले गिरोहों को पकड़ना मुश्किल हो गया है।
भागने का रूट तलाशना हुआ कठिन: लूट और डकैती जैसी बड़ी वारदातों के बाद बदमाश किस चौराहे से आउटर की तरफ भागे, इसका कोई डिजिटल बैकअप पुलिस को नहीं मिल पा रहा है।
निजी कैमरों और मुखबिरों पर निर्भरता: आईटीएमएस के कैमरे काम न करने से पुलिस को आसपास की दुकानों, मकानों के निजी कैमरों और पुराने मुखबिर तंत्र पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे जांच में काफी वक्त बर्बाद हो रहा है।
हिट एंड रन के मामले अनसुलझे: सड़क हादसों और हिट एंड रन के मामलों में भी वाहन चालकों की पहचान नहीं हो पा रही है।
व्यापारियों से कैमरे लगवा रही पुलिस
आईटीएमएस के भरोसेमंद नहीं रहने के बाद पुलिस अब निजी सीसीटीवी कैमरों पर निर्भर हो रही है। वारदात वाले इलाके की दुकानों, मकानों और प्रतिष्ठानों में लगे कैमरों की फुटेज जुटाई जा रही है। कई जगह पुलिस व्यापारियों और संस्थानों से अपने परिसर के बाहर कैमरे लगवाने के लिए भी कह रही है।
उन जगहों को फोकस किया जा रहा है जहां सड़कों पर कटिंग या फरार होने के रास्ते ज्यादा हैं। हालांकि निजी कैमरों का कवरेज सीमित होने और अलग-अलग गुणवत्ता के कारण हर मामले में अपेक्षित फुटेज नहीं मिल पाती।
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कैमरों और सिग्नल का मेंटेनेंस करने वाली कंपनी का भुगतान लंबित है। इसके लिए पत्राचार किया गया है। भुगतान होने के बाद कैमरों और सिग्नल को सुधारने का काम किया जाएगा। – डॉ. अर्चना झा, डीसीपी, ट्रैफिक