शिक्षक पदोन्नति 2025 की DPC में 50% कोटे की अनदेखी, हाई कोर्ट ने पूछा- सिर्फ LB कैडर को ही क्यों मिली पदोन्नति?

HighLights
- शिक्षक पदोन्नति की 2025 डीपीसी पर हाई कोर्ट सख्त।
- ई-कैडर को बाहर रखने पर राज्य सरकार से मांगा जवाब।
- पूर्व में दी गई अंतरिम राहत अगली सुनवाई तक जारी।
, बिलासपुर। शिक्षक पदोन्नति की 2025 में हुई विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) में 50 प्रतिशत के निर्धारित अनुपात का पालन नहीं करने और ई-कैडर के पात्र शिक्षकों को पदोन्नति के लिए विचार से बाहर रखने के मामले में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
ब्रजेश मिश्रा सहित कई शिक्षकों की याचिकाओं पर जस्टिस बिभु दत्ता गुरु ने 21 सितंबर 2026 को राज्य के अधिवक्ता को निर्देश दिया कि वह सरकार से जानकारी लेकर बताए कि 2025 की डीपीसी में केवल शिक्षक (एलबी कैडर) को ही क्यों शामिल किया गया, जबकि शिक्षक (ई-कैडर) भी 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए पात्र थे।
याचिकाकर्ताओं का मुख्य मुद्दा पदोन्नति के लिए पात्र शिक्षकों के कैडर से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने राज्य से विशेष रूप से पूछा है कि 2025 में हुई डीपीसी में 50 प्रतिशत का अनुपात क्यों नहीं अपनाया गया। कोर्ट के सामने यह बात रखी गई कि डीपीसी में केवल शिक्षक (एलबी कैडर) के मामलों पर विचार किया गया।
ई-कैडर की अनदेखी राज्य सरकार से जवाब-तलब
वहीं शिक्षक (ई-कैडर) के ऐसे सदस्य, जो 1 जनवरी 2025 से पदोन्नति के लिए पात्र थे, उन्हें प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। कई याचिकाएं एक साथ चल रही हैं। अन्य याचिकाओं में इन मामलों में अलग-अलग पक्षकारों की ओर से अधिवक्ताओं ने पैरवी की। राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता वाईएस ठाकुर ने पक्ष रखा।
कई हस्तक्षेपकर्ताओं और अन्य पक्षकारों की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित रहे। पहले से मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में आवश्यक निर्देश लेकर अगली सुनवाई में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। इन याचिकाओं को दो सप्ताह बाद वाले सप्ताह में सुनवाई के लिए रखा गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले से दी गई अंतरिम राहत अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।
तीन मामलों को अलग किया गया
सुनवाई के दौरान तीन याचिकाओं को मुख्य याचिकाओं के समूह से अलग कर दिया गया। इन मामलों के वकीलों ने कहा कि उनके मामले के मुद्दे बाकी याचिकाओं से अलग हैं। राज्य की ओर से बताया गया कि इन मामलों में उठाए गए मुद्दों पर पहले ही फैसला हो चुका है और संबंधित आदेश पेश करने के लिए समय मांगा गया। हाई कोर्ट ने इन तीनों मामलों को अलग करते हुए 23 सितंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
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