अपने तरह के अनूठे हिंदू रास गरबा का तीन दिवसीय सफल आयोजन,…- भारत संपर्क

बिलासपुर तिलक नगर सरस्वती शिशु मंदिर में तीन दिवसीय हिंदू रास गरबा का आयोजन किया गया, जिसका समापन रविवार को हुआ । यहां फूहड़ता और अश्लीलता से दूर पारंपरिक रूप से मां अंबे की आराधना करते हुए रास गरबा किया गया। नारी शक्ति टीम के इस आयोजन में सभी प्रतिभागियों के आधार कार्ड देखकर उन्हें प्रवेश दिया गया।

गुजरात की लोक संस्कृति से आरंभ रास गरबा डांडिया को अब लोगों ने मनोरंजन का साधन मान लिया है, जबकि यह विशुद्ध रूप से देवी आराधना की परंपरा है। गरबा में हाथों में लकड़ी के दो स्टिक लेकर नर्तक उसे एक दूसरे से टकराते एवं परिक्रमा करते हुए नृत्य करते हैं ।असल में यह मां दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध का नाटकिय रूपांतरण है। गुजरात में इस तरह से देवी को श्रध्दा अर्पित की जाती है लेकिन धीरे-धीरे इसमें भी अपसंस्कृति का प्रवेश हुआ। छोटे-छोटे भड़कीले कपड़े पहनकर युवतियां इसमें शामिल होने लगी। आयोजन में फूहड़ फिल्मी गाने बजाए जाने लगे। आयोजन के दौरान लड़कियों को ताड़ने बदमाश किस्म के युवक इसमें शामिल होने लगे। इन्हीं अप संस्कृतियों को दूर करने के लिए 3 साल पहले नारी शक्ति टीम ने भी विशेष रास गरबा डांडिया आयोजन का निर्णय लिया, जिसे हिंदू रास गरबा महोत्सव का नाम दिया गया ।

आयोजन के तहत इस बार भी तिलक नगर सरस्वती स्कूल प्रांगण में 4 से 6 अक्टूबर को आयोजन किया गया। नारी शक्ति टीम ने बताया कि रास गरबा विशुद्ध रूप से मां अंबे की उपासना का पर्व है। इसमें केवल उन्हें ही शामिल होना चाहिए जिनकी श्रद्धा मां जगदंबे की पूजा, अर्चना और आराधना के प्रति है। इसलिए उनके द्वारा इस आयोजन में केवल हिंदू परिवारों को ही प्रवेश दिया गया। प्रवेश द्वार पर ही सब के आधार कार्ड की जांच की गई। मेहमानों को तिलक लगाकर गंगाजल पिलाकर उनके हाथ में राम नाम का मुहर लगाया गया, ताकि आयोजन में कोई भी विधर्मी सम्मिलित ना हो सके ।

नारी शक्ति टीम द्वारा आयोजित हिंदू रास गरबा महोत्सव 2024 में भजनों पर ही डांडिया नृत्य किया गया। आयोजन में भारतीय परंपरा और संस्कृति की स्पष्ट झलक नजर आई। इसका संचालन चूंकि नारी शक्ति ने किया इसलिए आयोजन में भारतीय परंपरा के साथ अनुशासन और शालीनता भी स्पष्ट दिखाई दी। सभी प्रतिभागी यहां भारतीय पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। अपनी तरह के इस अनुकरणीय आयोजन को लेकर प्रतिभागी भी प्रसन्न दिखे।

ऐसे तो बिलासपुर में कई आयोजन हुए, जहां देवी भक्ति नहीं बल्कि टीवी और फिल्मों में फूहड़ प्रदर्शन करने कथित सेलिब्रिटी की झलक देखने भीड़ उमड़ी, लेकिन जिनमे सच में माता जगदंबे के प्रति भक्ति है, वे हिंदू रास गरबा में ही सम्मिलित हुए। इसी तरह का आयोजन गुजराती समाज द्वारा भी टिकरापारा में किया जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति के संरक्षण के साथ अपसंस्कृति को मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं।