आईसीसी फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए टीम इंडिया को क्या चाहिए? | ho… – भारत संपर्क

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आईसीसी फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को हराने के लिए टीम इंडिया को क्या चाहिए? | ho… – भारत संपर्क

फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को कैसे हरा पाएगी टीम इंडिया? (PC-Image Credit source: Alex Davidson-ICC/ICC via Getty Images)
जून 2023, नवंबर 2023 और फरवरी 2024 या आप इसे उलट कर ऐसे भी लिख सकते हैं फरवरी 2024, नवंबर 2023 और जून 2023. इस उलट-पलट का हालांकि कोई बड़ा असर नहीं होने वाला. ये कुल आठ महीने की कहानी है. जो भारतीय क्रिकेट फैंस के जख्मों को ताजा ही करती है. ये वो तीन महीने हैं जब आईसीसी टूर्नामेंट के फाइनल में भारतीय टीम पहुंची. तीनों ही बार भारत का सामना ऑस्ट्रेलिया से था. तीनों ही बार भारत को हार का सामना करना पड़ा. जून 2023 में भारतीय टीम को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा. ये मुकाबला न्यूट्रल वेन्यू इंग्लैंड में खेला गया था. इसके बाद नवंबर 2023 में भारतीय टीम को अपने घर में वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में हार मिली. ताजा हार अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल की है.
दक्षिण अफ्रीका के बेनोनी में एक बार फिर भारतीय टीम की किस्मत में हार ही आई. यानि भारतीय टीम को अपने घरेलू दर्शकों के सामने हार का सामना करना पड़ा. इसके अलावा न्यूट्रल वेन्यू पर भी टीम इंडिया को कुछ फायदा नहीं हुआ. ऑस्ट्रेलिया अपने घर में खेले बिना तीनों बार जीता. गौर करने वाली बात ये भी है कि इन तीनों ही मौकों पर भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन करके फाइनल तक का सफर तय किया था. ऐसे में भारतीय क्रिकेट फैंस के मन में एक ही सवाल है-आईसीसी फाइनल में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को कैसे हराएगी?
कहां फंस जा रही है टीम इंडिया?
आईसीसी टूर्नामेंट का फाइनल दबाव वाला मैच होता है. टूर्नामेंट के फाइनल तक आप कैसे पहुंचे हैं ये बात मायने नहीं रखती. नए सिरे से सारी योजना बनानी होती है. भारतीय टीम यहीं गलती कर रही है. ये गलती सामूहिक तौर पर हो रही है. यानि तीनों ही फाइनल में हार की वजह ‘कलेक्टिव फेल्योर’ है. वो तमाम खिलाड़ी जो फाइनल तक सबसे ज्यादा रन बनाने या सबसे ज्यादा विकेट लेने की रेस में सबसे आगे हैं वो अचानक फीके दिख रहे हैं. कोई एक भी खिलाड़ी फाइनल में मैच विनर की भूमिका में नहीं दिख रहा है. जबकि फाइनल से पहले यही खिलाड़ी अक्सर अकेले ही मैच का नतीजा पलटते आ रहे हैं. ये स्थिति तब है जब पिछले दो दशक में क्रिकेट में वर्चस्व की लड़ाई भी भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ही रही है.
वर्चस्व की इस लड़ाई में बड़े मौकों पर ऑस्ट्रेलिया ने ज्यादातर मैचों में बाजी मारी है. आप 2011 के वर्ल्ड कप को याद कीजिए. अहमदाबाद में खेले गए क्वार्टर फाइनल मैच में जैसे ही भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हराया भारतीय क्रिकेट फैंस ये कहने लगे कि अब भारतीय टीम के हाथ से वर्ल्ड कप कोई नहीं ले जा सकता. हुआ भी यही. पहले सेमीफाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराया और फिर फाइनल में श्रीलंका को. इसके साथ ही धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने दूसरी बार वर्ल्ड कप जीत लिया. लेकिन सवाल ये है कि ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बड़े मैच जीतने के लिए भारत को क्या करना होगा. इसका जवाब सीधा है- भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कुछ बड़े मैच जीतने होंगे. इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है. बड़े मैच की जीत से आया आत्मविश्वास ही टीम इंडिया को जीत के रास्ते पर लाएगा.
पाकिस्तान के उदाहरण से समझिए बात
आप 2003 वर्ल्ड कप का फाइनल याद कीजिए. ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था. 2015 का सेमीफाइनल याद कीजिए. वहां भी ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराया था. कई बार बड़े मैचों में हार का डर मन से निकलने में कई बरस लग जाते हैं. वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान की टीम के मन का डर तो आज भी नहीं निकला. वनडे वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की टीम आजतक भारत को हरा ही नहीं पाई. लेकिन पाकिस्तान के ही उदाहरण का एक और पहलू याद कीजिए.
1986 में शारजाह का वो मैच याद कीजिए जब जावेद मियांदाद ने चेतन शर्मा की आखिरी गेंद पर छक्का मारकर पाकिस्तान को जीत दिला दी. इसके बाद लंबे समय तक फंसे हुए मैच में पाकिस्तान का पलड़ा भारत पर भारी था. लेकिन 2004 में बाजी पलटी. भारतीय टीम पाकिस्तान के दौरे पर थी. भारतीय टीम का ये पाकिस्तान दौरा 14 साल बाद हुआ था. इसी दौरे में कराची में मैच था. आखिरी ओवर में 10 रन चाहिए थे. कप्तान सौरव गांगुली ने आशीष नेहरा को आखिरी ओवर दिया. क्रीज पर मोइन खान थे, पवेलियन में जावेद मियांदाद. मियांदाद उस वक्त पाकिस्तान के कोच थे. नेहरा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए भारत को जीत दिला दी. इस मैच ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट की तस्वीर ही बदल कर रख दी.
भारतीय खिलाड़ियों के मन में ये विश्वास भर गया कि फंसे हुए मैच में उन्हें भी जीतना आता है. आप इस मैच के बाद भारत बनाम पाकिस्तान मैच के रिकॉर्ड्स खंगाल लीजिए. आप पाएंगे कि 2004 की इस जीत के बाद भारतीय टीम की जीत का प्रतिशत बेहतर हो गया है. भारत ने पाकिस्तान के मुकाबले ज्यादा मैच जीते हैं. वनडे क्रिकेट के इतिहास में भारत और पाकिस्तान ने कुल 135 मैच खेले हैं. इसमें भारत को 57 मैच में जीत मिली है जबकि 73 मैच पाकिस्तान ने जीते हैं. यानि भारत के खाते में तकरीबन 40 फीसदी मैचों में जीत है. लेकिन 2004 में मिली जीत के बाद कुल 49 वनडे मैच दोनों टीम ने खेले हैं. इसमें भारत के पास 27 जीत है पाकिस्तान के पास 21. यानि करीब 55 फीसदी मैच भारत ने जीते हैं. कुल मिलाकर बात बहुत सीधी है. कई बार सिर्फ एक या दो मैच में मिली जीत सामने वाली टीम के खिलाफ रिकॉर्ड्स सुधार देती है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारतीय टीम को ऐसे ही एकाध-दो बड़े मैच में जीत चाहिए. रिकॉर्ड्स अपने आप बेहतर हो जाएंगे.

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