कौन हैं 156 की स्पीड से बॉल फेंकने वाले मयंक यादव? विराट कोहली की तरह वेजिट… – भारत संपर्क

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कौन हैं 156 की स्पीड से बॉल फेंकने वाले मयंक यादव? विराट कोहली की तरह वेजिट… – भारत संपर्क

मयंक यादव को टीम इंडिया के लिए चुना गया है. (Photo: PTI)
6 अक्टूबर से भारतीय टीम को बांग्लादेश के खिलाफ 3 मैचों की टी20 सीरीज खेलनी है. इसके लिए टीम इंडिया का ऐलान हो चुका है. बीसीसीआई ने 15 सदस्यों वाले स्क्वॉड की लिस्ट जारी कर दी है. इस सीरीज में तेज गेंदबाज मयंक यादव को भी मौका दिया गया है. आईपीएल में अपनी 156.7 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंद फेंककर सनसनी फैलाने वाले मयंक पहली बार इंटरनेशनल स्टेज पर दिखेंगे. मयंक की क्रिकेट में एंटी बहुत ही दिलचस्प है. उनके पिता खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे लेकिन परिस्थितियों के आगे वह हार गए. आज उनका बेटे मयंक टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले हैं. आइये जानते हैं मयंक के भारतीय टीम तक पहुंचने की पूरी कहानी.
ऐसे हुई क्रिकेट में एंट्री
मयंक यादव के पिता प्रभु यादव मूलतः बिहार के सुपौल जिले के रहने वाले हैं. हालांकि, मयंक का जन्म दिल्ली में ही हुआ और यही पले-बढ़े हैं. प्रभु यादव 4 भाई थे और उनकी 2 बहनें थीं. उन्होंने अपने इंटरव्यू में बताया है कि घर में वो दूसरे नंबर पर थे. उन्हें खुद क्रिकेट खेलना पसंद था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब होने के कारण उन्हें 18 साल की उम्र में कमाने के लिए दिल्ली आना पड़ा था. इस तरह क्रिकेट उनसे दूर हो गया. लेकिन दिल्ली में रहने के दौरान मयंक का जन्म हुआ और उन्होंने बेटे के जरिए अपना सपना पूरा करने की कोशिश की.
जब वो 4 साल के थे तब एक बार उनके पिता छुट्टी के दिन पार्क घुमाने के ले गए. इस दौरान उन्होंने बच्चों को क्रिकेट खेलते देखा तो अपने सपने की याद आ गई. फिर उन्होंने बेटे से पूछा- ‘क्या तुम क्रिकेट खेलोगे?’. इस पर मयंक ने कहा- ‘जैसी आपकी मर्जी’. इस तरह उनका क्रिकेट खेलना तय हो गया. इसके बाद उनके पिता ने जिमखाना क्रिकेट क्लब में एडमिशन करा दिया. खेलने के साथ धीरे-धीरे मयंक की रुची तेज गेंदबाजी में बढ़ी और इसी में रम गए. 16 साल की उम्र में मयंक ने सोनेट क्लब का रुख किया, जहां कोच तारक सिन्हा उनके टैलेंट को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
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कोई नहीं सिखाना चाहता था क्रिकेट
मयंक के पिता ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि जब 16 साल के थे और अच्छे क्लब की तलाश कर रहे थे, तब वो अपने पिता के साथ दिल्ली के कई क्लब में गए. लेकिन सभी ने उन्हें क्रिकेट सिखाने से मना कर दिया. हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और कोशिश करते रहे. फिर उन्हें दिल्ली के सोनेट क्लब के बारे में पता चला. प्रभु यादव ने बताया है कि कोच तारक सिन्हा निष्पक्ष होने के लिए जाने जाते थे. इसलिए वो उनके पास गए और जब ट्रायल हुआ तो वहां मौजूद सभी लोग मयंकी की स्पीड और लाइन-लेंथ देखकर हैरान रह गए. उन्होंने उनके टैलेंट को निखारने की जिम्मेदारी ली, लेकिन वो इतने प्रभावित थे कि उन्होंने कोचिंग की फीस लेने से मना कर दी.
वेजिटेरियन हैं मयंक, दिल्ली में उनका खौफ
6 फीट 1 इंच के मयंक यादव आईपीएल में खेलने से पहले घरेलू क्रिकेट में दिल्ली के लिए खेला करते थे. वो अपनी स्पीड और खतरनाक बाउंसर के लिए मशहूर थे. इस वजह से दिल्ली के बल्लेबाजों में उनका खौफ रहता था. उनकी उम्र के लड़के तो खेलने से ही घबराते थे. मयंक ने खुद खुलासा कर चुके हैं कि जब वो 14 साल के थे, तब उनके कोच तारक सिन्हा ने उनके एज ग्रुप के लड़कों के साथ प्रैक्टिस तक करने से मना कर दिया था.
वहीं उन्हें आईपीएल में लाने वाले विजय दहिया, विजय हजारे ट्रॉफी की नेट्स में गेंदबाजी करता देख दंग रह गए थे. उन्होंने तुरंत लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए बुलावा भेज दिया था. इसके बाद उन्होंने आईपीएल डेब्यू किया और अब टीम इंडिया के लिए डेब्यू करने वाले हैं. 156.7 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से गेंद फेंकने वाले मयंक विराट की तरह वेजिटेरियन हैं. उनके पिता प्रभु यादव ने बताया है कि 4 साल पहले उन्होंने नॉन वेज छोड़ दिया था.

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