सड़कों के गड्ढों के जिम्मेदार कौन? निगम के अफसरों की भूमिका…- भारत संपर्क
सड़कों के गड्ढों के जिम्मेदार कौन? निगम के अफसरों की भूमिका सवालों के घेरे में, साकेत से सड़क तक सियासत पर अधिकारियों की खामी गिनाना भूले
कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा शहर की सड़कों का बुरा हाल है। वाहनों का तो दूर पैदल चलना तक दूभर हो रहा है।घटिया सड़क निर्माण का खामियाजा आमजनों को भुगतना पड़ रहा है। सड़क को लेकर जहां साकेत से सड़क तक सियासत गरमाई रही, वहीं घटिया सड़क के मुख्य किरदार नगर निगम के अधिकारियों पर जांच की आंच तक नहीं आई है। लंबे समय से जमे इंजीनियर और अफसरों पर जांच को लेकर कोई मांग तो दूर, बात तक नहीं हो रही है। अगर सड़क घटिया बन रही तो अफसरों ने क्यों इसकी गुणवत्ता नहीं परखी। जिले में नगर निगम अन्तर्गत शहर की सड़क खासकर टीपी नगर में हालत बेहद खराब है। यह श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन का विधानसभा क्षेत्र भी है। इसके बाद मंत्री द्वारा भी निगम के अफसरों पर किसी तरह की कार्रवाई को लेकर निर्देश जारी नहीं करना सवाल पैदा कर रहा है। जनता की समस्या पर पूर्व कैबिनेट मंत्री भी खामोश हैं।सियासी गलियारे में इसे लेकर चर्चा सरगर्म है। सड़क का उखड़ना, कहीं ना कहीं निगम के उच्च अधिकारियों के बनाए हुए इस्टीमेट/प्राकलन के उप्पर सवालिया निशान छोड़ रहा है। सिर्फ किसी एक ठेकेदार द्वारा बनाई गई रोड़ उखड़ती तो उक्त ठेकेदार की गलती साबित हो सकती थी, पर यहां पूरा कोरबा ही खोदापुर बन चुका है। ऐसे में ये सवाल उठता है की क्या निगम के उच्च अधिकारियों द्वारा बनाया गया प्राकलन कोरबा की मुख्य सड़कों के मुताबिक था या नहीं था? सड़क डामरीकरण के कार्यों में निगम के अभियंता डामर प्लांट से सड़क निर्माण होने वाली साइट तक अपनी देख रेख में इस कार्य को कराया या नहीं ? डामर प्लांट से आने वाली गाड़ियों का टेंपरेचर चेक करने से पैवर मशीन से बिछने वाले डामर तक का नापी अभियंताओं द्वारा लिया गया या नहीं? सड़क निर्माण कार्यों के दौरान दिन में 3 से 4 बार निरक्षण करते हुए अधीक्षण अभियंता के निगरानी में सभी कार्य करवाए जाते हैं। कार्यों की गुणवत्ता का मूल्यांकन भी इन्ही अभियंताओं द्वारा किया जाता है। शहर के लोगो की जान से खिलवाड़ करते हुए इस तरह का निम्न प्राकलन बनाना अधिकारियों पर सवालिया निशान खड़ा करता है। क्या लोगो की जान से खेलते हुए कम पैसे में मुख्य सड़कों का कार्य करवाना चाह रहे थे निगम के अधिकारी, जहां रोजाना हजारों गाड़ियां चलती है। हाल ही में निगम अधिकारियों द्वारा खुद के बचाव में एक फर्म का राशि राजसात किया गया है। परंतु संबंधित ठेकेदार का कहना है की उनके सड़क निर्माण कार्य की राशि को अवैधानिक रूप से 3 वर्ष और 3 महीना बाद राजसात कर लिया गया, जबकि नियमानुसार उनके द्वारा सड़क रखरखाव करने की अवधि पहले ही समाप्त हो चुकी थी। उक्त मामले को लेकर ठेकेदार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसपर निगम आयुक्त को मुख्य न्यायधीश द्वारा नोटिस जारी कर जवाब देने भी कहा था। बहरहाल अब देखना ये है की निगम अधिकारियों द्वारा बनाया गया ये प्राकलन गलत है या शहर के विभिन्न सड़कों का कार्य करने वाले ठेकेदार गलत हैं। पहले भी नगर निगम की कार्यशैली चर्चा में है। आरोप लगते रहे हैं कि भ्रष्टाचार का बोलबाला इतना की अधिकारियों द्वारा गुणवत्ताहीन काम कराया जाता है। ताकि वह अपनी जेब भर सके जनता की गाढ़ी कमाई का बंदरबांट किया जाता है।
अन्य सड़कों का हाल भी बेहाल
निगम द्वारा कई कार्य 1-2 वर्ष के अंतराल में ही करवाए गए हैं, जो की अभी से उखड़ने लगे हैं, जिसमे पुराना कोर्ट पीडब्ल्यूडी ऑफिस जाने वाली रोड़, घंटाघर से एसईसीएल, हेलीपैड, कालीबाड़ी रोड़, जब सभी रोड़ उखड़ रही है तो ऐसे में निगम अधिकारियों को अभयदान समझ से परे है।