सनस्क्रीन में क्यों जरूरी है SPF नंबर, एक्सपर्ट्स से जानिए ये पूरा लॉजिक,…

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सनस्क्रीन में क्यों जरूरी है SPF नंबर, एक्सपर्ट्स से जानिए ये पूरा लॉजिक,…
सनस्क्रीन में क्यों जरूरी है SPF नंबर, एक्सपर्ट्स से जानिए ये पूरा लॉजिक, भारतीयों की स्किन के लिए कौन सी है परफेक्ट

सनस्क्रीन से जुड़ी हर जानकारी Image Credit source: getty

मौसम चाहे कोई भी हो, स्किन पर सूरज की यूवी यानी अल्ट्रा वायलेट किरणों का असर पड़ता ही है. धूप से बचने के लिए हम कई तरह के हल्के-फुल्के टिप्स को फॉलो करते हैं लेकिन बावजूद इसके हमारी स्किन बच नहीं पाती. गर्मियों का मौसम आ गया है और ऐसे में स्किन का बचाव कैसे करें? तो इस सवाल के जवाब में स्किन एक्सपर्ट्स घर या घर से बाहर निकलते हुए चेहरे पर सनस्क्रीन लगाने की सलाह देते हैं. डर्मेटोलॉजिस्ट का कहना है कि सनस्क्रीन हमारी त्वचा में प्रोटेक्टिव लेयर की तरह काम करती है.

तो क्या हर इंसान के लिए सनस्क्रीन जरूरी है? इसके जवाब में अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी एसोसिएशन का कहना है- हर किसी को. ऐसी कई सारी रिसर्च आ चुकी हैं, जिनमें ये बात सामने आई है कि यूवी किरणें स्किन कैंसर का कारण बन सकती हैं. ऐसे में स्किन को बचाने के लिए सनस्क्रीन जरूर लगाएं. अहमदाबाद के अपोलो हॉस्पिटल में कंसल्टेंट डर्मेटोलॉजिस्ट और कॉस्मोटोलॉजिस्ट डॉ. पूजा सोलंकी व्यास का कहना है कि बेशक सनस्क्रीन हमारी त्वचा की सुरक्षा के लिए है. लेकिन सनस्क्रीन में सबसे ज्यादा महत्व SPF यानी Sun Protection Factor का है. यही चीज हमारी स्किन को यूवी रेज़ से बचाती है.

आखिर क्या है SPF नंबर का मतलब

पुणे में डॉ. डीवाई पाटिल मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल और रिसर्च सेंटर में डर्मेटोलॉजिस्ट विभाग के हेड और प्रोफेसर डॉ. आयुश अंस बताते हैं कि SPF एक मानक की तरह है, जिससे ये पता चलता है कि सनस्क्रीन त्वचा को यूवी किरणों से कितनी बेहतर तरीके से बचा सकती है. जैसे- सनब्लॉक क्रीम का इस्तेमाल नहीं करने पर 20 मिनट के भीतर ही त्वचा झुलस सकती है. लेकिन अगर आप 15 SPF वाली सनस्क्रीन लगाते हैं तो इससे आपको 300 मिनट तक सुरक्षा मिलेगी. डॉ. आयुश कहते हैं कि SPF के भी कई प्रकार हैं. ये 15, 30, 50 और 70 में उपलब्ध है यानी एसपीएफ जितना ज्यादा होगा, धूप से स्किन उतनी ज्यादा सुरक्षित रहेगी.

कितने तरह की सनस्क्रीन

डॉ. पूजा सोलंकी व्यास कहती हैं कि सनस्क्रीन दो तरह की होती है- फिजिकल और केमिकल सनस्क्रीन. फिजिकल सनस्क्रीन UVA और UVB किरणों से बचाने के लिए फिजिकल बैरियर बनाती है. इसमें टाइटेनियम डाइऑक्साइड और जिंक जैसे तत्व होते हैं. वहीं, केमिकल सनस्क्रीन ऑक्टीसेलेट और अवोबेनजोन नाम के तत्व पाए जाते हैं. येकिरणों को अवशोषित करती है.

स्किन पर कैसे करती है काम

लॉर्ड्स मार्क बायोटेक में वेलनेस कोच और न्यूट्रिशियनिस्ट सांची तिवारी बताती हैं कि सनस्क्रीन में मौजूद एक्टिव तत्व यूवी किरणों को अबसॉर्ब या रिफ्लेक्ट करके त्वचा को बचाता है. दरअसल, ये हमारी स्किन पर बैरियर की तरह काम करती है, जो हानिकारक किरणों को त्वचा के अंदर जाने से रोकती हैं. दिल्ली के श्रीबालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में सीनियर कंसल्टेंट, डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. विजय सिंघल कहते हैं कि अगर आपकी सनस्क्रीन में अल्ट्रावायलेट ए और अल्ट्रावायलेट बी प्रोटेक्शन नहीं है तो आपको ऐसे सनस्क्रीन के प्रयोग से बचना चाहिए. कई सारी ऐसी सनस्क्रीन भी आती हैं, जिनमें 6 या इससे ज्यादा एक्टिव कंपाउंड मिलकर त्वचा की रक्षा करते हैं.

SPF स्केल से जानिए

  • SPF 2- केवल 2% UVB किरणों को ब्लॉक करता है
  • SPF 15- 93%
  • SPF 30- 97%
  • SPF 50- 98%

कितने SPF वाली सनस्क्रीन ज्यादा बेहतर

डॉ. विजय सिंघल कहते हैं कि SPF अल्ट्रावायलेट किरणों से आपकी स्किन की सुरक्षा करती है. 30 एसपीएफ 97% तक और 50 एसपीएफ 98% तक सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों को रोकती है. ऐसे में 50 एसपीएफ वाली सनस्क्रीन इस्तेमाल करना ज्यादा बेहतर है. वेलनेस कोच और न्यूट्रिशियनिस्ट सांची तिवारी कहती हैं कि सनस्क्रीन क्रीम, जेल और स्टिक में भी आती है. इसलिए हमेशा ब्रॉड स्पेक्ट्रम वाली सनस्क्रीन ही चुनें. भारत के वातावरण और भारतीय त्वचा के आधार पर एसपीएफ 15 से एसपीएफ 20 वाली सनस्क्रीन बेहतर काम करती है. हालांकि, आपकी स्किन के लिए कितने एसपीएफ वाली सनस्क्रीन फायदा करेगी, इसके लिए डॉक्टर से परामर्श लें.

गर्मियों में क्यों है जरूरी

गर्मियों में सूरज की गर्मी और अल्ट्रावायलेट किरणें तेज होती हैं- जिसके कारण त्वचा में सनबर्न, चकत्ते, मुंहासे, काले धब्बे और झुर्रियों का खतरा बढ़ जाता है. सनस्क्रीन लगाने से त्वचा पर एक परत बन जाती है जो सूरज की किरणों को त्वचा तक पहुंचने से रोकती है. हालांकि, सिर्फ गर्मियों में ही नहीं बल्कि सर्दियों में भी सनस्क्रीन लगाने की जरूत होती है.

सनसक्रीन लगाने का सही तरीका क्या है

डॉ. आयुश अंस कहते हैं कि अगर आप बाहर जा रहे हैं तो कम से कम 20 मिनट पहले सनस्क्रीन को चेहरे पर अप्लाई करें. अपने साथ हमेशा सनस्क्रीन रखें और हर दो घंटे के अंतराल पर इसे लगाते रहें. वहीं, डॉ. पूजा सोलंकी व्यास कहती हैं कि 6 महीने की कम उम्र के बच्चों को सनस्क्रीन नहीं लगानी चाहिए.

क्या सनस्क्रीन वाकई सेफ है

स्किन कैंसर ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक, फिजिकल और केमिकल दोनों ही सनस्क्रीन त्वचा के लिए सेफ मानी जाती हैं. हालांकि, डॉ. पूजा सोलंकी व्यास कहती हैं कि हर चीज के अपने नफे-नुकसान हैं. सनस्क्रीन पर भी यही नियम लागू होता है. कुछ लोगों को इससे त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं जैसे लालिमा, सूजन, जलन और खुजली हो सकती है. ऐसी स्थिती में डॉक्टर से संपर्क करें.

कई सारे मिथ भी

सनस्क्रीन को लेकर कई सारे दावे भी किए जाते रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इससे स्किन कैंसर होने का खतरा है. लेकिन हार्वड की रिसर्च ने ऐसे दावों को बेबुनियाद बताया है. साइंटिफिक तौर पर ऐसे कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है, जो ये बताते हों कि सनस्क्रीन कैंसर का कारण बन सकती है.

रखें इस बात का ध्यान

कुल मिलाकर स्किन एक्सपर्ट यही कहते हैं कि कोई भी अच्छी सनस्क्रीन धूप की अल्ट्रावॉयलेट किरणों से त्वचा की रक्षा करती है. सनस्क्रीन खरीदते समय हमेशा इस बात की जांच कर लें कि उसके लेबल पर UVA और UVB प्रोटेक्शन (बोर्ड स्पेक्ट्रम) प्रिंट हो. इसके साथ ही, अपनी डॉक्टर की सलाह पर अपनी स्किन टोन के अनुसार ही इसे अप्लाई करें.

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