28 साल पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में EOW ने पेश किया 1000 पन्नों का चालान, 22 लोगों पर गिरेगी गाज
28 साल पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में चालान पेश। (फाइल फोटो)HighLights
- 28 साल पुराने शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में कार्रवाई।
- EOW ने 22 लोगों के खिलाफ पेश किया चालान।
- 6 तत्कालीन अधिकारी और 16 चयनित अभ्यर्थी आरोपी।
न्यूज, कवर्धा : जिले के पंडरिया में 28 वर्ष पूर्व प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में हुए भ्रष्टाचार में ईओडब्ल्यू ने 22 लोगों के विरुद्ध विशेष न्यायालय में चालान पेश किया है। इनमें छह तत्कालीन लोकसेवक और 16 चयनित अभ्यर्थी हैं। वर्ष 1998 में हुई प्राथमिक शिक्षक (शिक्षाकर्मी वर्ग-3) भर्ती से जुड़े इस मामले में तीन आरोपितों की मृत्यु हो चुकी है। तत्कालीन जनपद पंचायत पंडरिया अध्यक्ष अर्जुन तिवारी ने 25 दिसंबर 1998 को 320 पदों पर हुई भर्ती चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत की थी। वर्ष 2000 में केस दर्ज होने के बाद अभी तक जांच ही चल रही थी।
चयन समिति से जुड़े रिश्तेदारों के नाम भी आए
- सोमवार को विशेष न्यायाधीश, कवर्धा के न्यायालय में पुलिस ने करीब 1,000 पृष्ठों का आरोप पत्र पेश किया। चयन समिति के तत्कालीन अध्यक्ष शंकरलाल चंद्रवंशी तथा सदस्यों बृज बिहारी वैष्णव और अंबिकादत्त शर्मा की भूमिका की भी जांच की गई। चालान में दावा किया गया है कि समिति के सदस्यों के रिश्तेदार अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के दौरान अंक देने की प्रक्रिया के दौरान हितों का टकराव हुआ।
बिलासपुर में महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ का दोषी शिक्षक बर्खास्त
महिला शिक्षिका से छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में दोषी ठहराए गए शासकीय शिक्षक विवेक गुप्ता को शिक्षा विभाग ने सेवा से बर्खास्त कर दिया है। तखतपुर न्यायालय से सजा मिलने के बाद भी शिक्षक बेलमुंडी स्कूल में ड्यूटी कर रहा था। संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग बिलासपुर ने 23 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर उसे सेवा से मुक्त कर दिया। बर्खास्तगी 26 सितंबर 2026 से प्रभावी की गई है।
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आरक्षण और अनुभव प्रमाणपत्रों पर भी सवाल
जांच में सामने आया है कि सामान्य महिला वर्ग के 49 पदों के लिए 160 अभ्यर्थियों को बुलाया गया। इनमें 130 सामान्य, 26 अन्य पिछड़ा वर्ग, तीन अनुसूचित जाति और एक अनुसूचित जनजाति वर्ग की अभ्यर्थी थीं। वर्गवार आरक्षण और समायोजन के नियमों के पालन पर सवाल उठे हैं। अनुसूचित जाति के दिव्यांग वर्ग के चार पदों के लिए 15 आवेदकों में से 10 को बुलाने का मामला भी जांच में शामिल रहा।
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