छत्तीसगढ़ से MP क्यों जा रहे फिल्म प्रोजेक्ट? लोकेशन तो पसंद आई लेकिन… सब्सिडी भुगतान और सरकारी प्रक्रिया बन रही रोड़ा
छत्तीसगढ़ की फिल्म नीति के बावजूद दूसरे राज्यों में जा रहे प्रोजेक्ट HighLights
- फिल्म नीति में बड़े प्रोजेक्टों को दो करोड़ तक सहायता
- स्थानीय फिल्मों को 33 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रविधान
- सब्सिडी भुगतान और अनुमति में देरी बनी बड़ी परेशानी
, रायपुर। छत्तीसगढ़ में फिल्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने और फिल्म निर्माताओं को प्रदेश में शूटिंग के लिए आकर्षित करने के उद्देश्य से 2021 में फिल्म नीति लागू की गई थी। नीति में बड़े प्रोजेक्टों के लिए करोड़ों रुपये तक की सब्सिडी और शूटिंग के लिए प्रदेश की खूबसूरत लोकेशन उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। हालांकि, फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक सरकारी प्रक्रिया की देरी अब निर्माताओं के लिए बड़ी परेशानी बन रही है।
उद्योग से जुड़े लोगों का दावा है कि पिछले एक-दो वर्ष में 25 से ज्यादा फिल्म और वेब सीरीज प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में चले गए। कहीं सब्सिडी का भुगतान अटका तो कहीं शूटिंग की अनुमति मिलने में देरी हुई। इन कारणों से निर्माताओं ने दूसरे राज्यों का रुख किया। इसका सीधा असर स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों, होटल, वाहन संचालकों और छोटे कारोबारियों को मिलने वाले काम पर भी पड़ा।
एक से दो करोड़ तक सब्सिडी का प्रविधान
छत्तीसगढ़ की फिल्म नीति में बड़े बॉलीवुड और ओटीटी प्रोजेक्ट के लिए एक से दो करोड़ रुपये तक सहायता देने का प्रविधान है। वहीं स्थानीय फिल्मों को उनके बजट का 33 प्रतिशत, अधिकतम 15 लाख रुपये तक देने की व्यवस्था की गई है।
इसके बावजूद फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि सब्सिडी का भुगतान समय पर नहीं होना बड़ी समस्या है। निर्माताओं को लंबे समय तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कई निर्माता समय और लागत बचाने के लिए दूसरे राज्यों में शूटिंग करना ज्यादा बेहतर विकल्प मान रहे हैं।
‘ग्राम चिकित्सालय’ का पहला सीजन यहां, दूसरा मध्यप्रदेश में
छत्तीसगढ़ से प्रोजेक्ट बाहर जाने का एक उदाहरण ‘ग्राम चिकित्सालय’ है। इस वेब सीरीज का पहला सीजन छत्तीसगढ़ में शूट किया गया था, लेकिन दूसरे सीजन के लिए मध्यप्रदेश के बालाघाट और मंडला को चुना गया।
इसी तरह ‘मिशन रानीगंज’ की शूटिंग भी जेल में अनुमति नहीं मिलने के कारण छत्तीसगढ़ में नहीं हो सकी। अनुराग कश्यप की ‘बंदर’, जार फिल्म्स का प्रोजेक्ट और श्रेयस तलपड़े से जुड़ा प्रोजेक्ट भी छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित होने के बावजूद आगे नहीं बढ़ सका।
विभाग में बदलाव का भी पड़ा असर
2021 में फिल्म नीति लागू होने के बाद संस्कृति विभाग में नेतृत्व और अधिकारियों के स्तर पर कई बदलाव हुए। कांग्रेस शासन में अमरजीत भगत के संस्कृति मंत्री रहते फिल्म नीति बनाई गई। इसके बाद विभाग की जिम्मेदारी बृजमोहन अग्रवाल और वर्तमान में राजेश अग्रवाल के पास रही।
विभागीय अधिकारियों में भी बदलाव हुए। फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक लगातार बदलावों का असर सब्सिडी से जुड़े प्रस्तावों की प्रक्रिया पर पड़ा और इसकी रफ्तार प्रभावित हुई। उनका कहना है कि निर्माताओं के लिए सिर्फ सब्सिडी का प्रविधान होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि भुगतान और अनुमति की प्रक्रिया भी समय पर पूरी होना जरूरी है।
मध्यप्रदेश की आसान प्रक्रिया बनी आकर्षण
फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक मध्यप्रदेश सहित कुछ अन्य राज्यों में शूटिंग की अनुमति और दूसरी सरकारी प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत आसान हैं। इसी वजह से निर्माता इन राज्यों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
छत्तीसगढ़ में पहले ‘न्यूटन’, ‘मिसेज फलानी’ और ‘आरजे बस्तर’ जैसी फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है। इसके अलावा ‘ग्राम चिकित्सालय’, ‘जहानाबाद’, ‘द ग्रेट इंडियन मर्डर’ और ‘सिक्स सस्पेक्ट्स’ जैसी वेब सीरीज के प्रोजेक्ट भी प्रदेश में शूट हुए हैं। ऐसे में इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सब्सिडी भुगतान और अनुमति की प्रक्रिया तेज की जाए तो छत्तीसगढ़ में फिल्म शूटिंग को फिर बढ़ावा मिल सकता है।
राजपत्र में कुछ बदलाव किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ महीने का समय लग रहा है। निश्चित तौर पर आने वाले डेढ़ महीने में यह बदलाव पूरा हो जाएगा और लोगों को सब्सिडी की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी।
– मोना सेन, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम अध्यक्ष
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