भिलाई-3 से दुर्ग तक 13 किमी में चौथी रेल लाइन, मौर्या चंद्रा अंडरब्रिज में लगा नया बाक्स, अब प्रदर्शनी की तैयारी
चौथी लाइन का चल रहा काम। HighLights
- भिलाई तीन से दुर्ग के बीच चौथी लाइन का काम
- 13 किलोमीटर लंबी रेल लाइन होनी है तैयार
- मार्च 27 तक पूरा करने का रखा गया लक्ष्य
टी.सूर्याराव, , भिलाई। रायपुर रेल मंडल के अंतर्गत भिलाई-3 से दुर्ग के बीच करीब 13 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा है। 13 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत मौजूदा तीन रेल लाइनों के समानांतर नई लाइन तैयार की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य इस व्यस्त रेलखंड की क्षमता बढ़ाने के साथ ट्रेनों के परिचालन को अधिक सुगम और व्यवस्थित करना है। रेलवे ने इस काम को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन वर्तमान में निर्माण की गति को देखते हुए निर्धारित अवधि में काम पूरा होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
चौथी लाइन के लिए ट्रैक बिछाने के साथ-साथ कई स्थानों पर रेलवे की मौजूदा संरचनाओं में भी बदलाव किया जा रहा है। इसी क्रम में मौर्या चंद्रा रेलवे अंडरब्रिज में नया बाक्स स्थापित कर दिया गया है। अब प्रदर्शनी रेलवे अंडरब्रिज में भी नया बाक्स लगाए जाने की तैयारी है। इसके बाद संबंधित हिस्से में चौथी लाइन के लिए आवश्यक संरचनात्मक कार्य आगे बढ़ाया जा सकेगा।
18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य
चौथी लाइन परियोजना को करीब 18 महीने की निर्धारित अवधि में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रेलवे के लिए यह काम इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि निर्माण के दौरान पहले से चालू तीन रेल लाइनों के परिचालन को प्रभावित किए बिना नई लाइन तैयार करनी है। कई स्थानों पर रेलवे ट्रैक, अंडरब्रिज, मिट्टी भराई, पुलिया, सिग्नलिंग और अन्य तकनीकी कार्यों को आपस में समन्वित करना होगा। ऐसे में यदि काम की गति में तेजी नहीं लाई गई तो मार्च 2027 की समय सीमा तक परियोजना पूरी करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भिलाई-3 से दुर्ग के बीच चौथी लाइन की जरूरत क्यों?
भिलाई-3 से दुर्ग के बीच का रेलखंड दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महत्वपूर्ण और व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस मार्ग से यात्री ट्रेनों के अलावा मालगाड़ियों का भी लगातार आवागमन होता है। भिलाई इस्पात संयंत्र और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों की वजह से माल परिवहन की दृष्टि से भी यह रेलखंड महत्वपूर्ण है। वर्तमान में तीन लाइनों पर ही यात्री और मालगाड़ियों का संचालन होने के कारण ट्रेनों को एक-दूसरे के पीछे चलाने, क्रॉसिंग कराने या मार्ग उपलब्ध होने की प्रतीक्षा जैसी परिस्थितियां बनती हैं। चौथी लाइन तैयार होने के बाद रेलवे के पास ट्रेनों के संचालन के लिए एक अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होगा। इससे यात्री और मालगाड़ियों के परिचालन को अलग-अलग दिशा में अधिक प्रभावी ढंग से व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। किसी एक लाइन पर रखरखाव या तकनीकी कार्य होने की स्थिति में भी अतिरिक्त लाइन रेलवे के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
ट्रेनों की रफ्तार और क्षमता बढ़ाने में मदद
नई लाइन का सबसे बड़ा फायदा रेलखंड की क्षमता बढ़ना होगा। वर्तमान तीन लाइनों पर बढ़ते यातायात का दबाव कम होगा और भविष्य में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश बनेगी। मालगाड़ियों के निर्बाध संचालन से औद्योगिक परिवहन को भी लाभ मिल सकता है। यात्री ट्रेनों के लिए समय-सारिणी को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी। रेल यातायात बढ़ने के साथ भविष्य में इस मार्ग पर और ट्रेनों की आवश्यकता पड़ने की संभावना है। ऐसे में चौथी लाइन को केवल वर्तमान यातायात की समस्या के समाधान के रूप में नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही आधारभूत संरचना के रूप में देखा जा रहा है।
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