छत्तीसगढ़ में हटेंगे 3 साल से जमे ‘बाबू’, डीजीपी अरुणदेव गौतम ने बदले नियम, DDO की तय हुई जिम्मेदारी
जगदलपुर की वेतन शाखा में मिली वित्तीय गड़बड़ी के बाद डीजीपी सख्त।HighLights
- जगदलपुर की वेतन शाखा में मिली वित्तीय गड़बड़ी के बाद डीजीपी सख्त
- वेतन भुगतान में मेकर-चेकर व्यवस्था अनिवार्य, हर प्रविष्टि की होगी जांच
- जगदलपुर एसपी दफ्तर में 4 करोड़ के वेतन घोटाले के बाद लिया एक्शन
राज्य ब्यूरो, , रायपुर। जगदलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन शाखा में करीब चार करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता उजागर होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने पूरे महकमे में वित्तीय नियंत्रण कड़ा करने का फैसला लिया है। पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुणदेव गौतम ने निर्देश जारी किया है कि पुलिस इकाइयों की विभिन्न शाखाओं में पदस्थ शाखा प्रभारियों और सहायकों को सामान्यतः तीन वर्ष से अधिक समय तक एक ही जगह नहीं रखा जाएगा। साथ ही वेतन देयकों की तैयारी से लेकर भुगतान तक कई स्तरों पर जांच अनिवार्य कर दी गई है।
अब स्वीकृत बल, वास्तविक पदस्थापना और रिक्त पदों का मिलान करने के बाद ही वेतन बिल तैयार होंगे। इसका उद्देश्य लंबे समय तक एक ही शाखा में जमे कर्मचारियों के कारण वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका कम करना और जवाबदेही तय करना है।
फर्जी आइडी बनाकर निकाले एक करोड़ से ज्यादा
जगदलपुर पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन शाखा में हुई जांच में दो तरह की गंभीर गड़बड़ियां सामने आई थीं। मासिक वेतन देयकों में अनियमित प्रविष्टियां कर शासन को तीन करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई। वहीं, एक कर्मचारी ने स्वयं और अपनी पत्नी के नाम से कृत्रिम आईडी बनाकर एक करोड़ रुपये से अधिक का अनियमित भुगतान कराया। दोनों मामलों में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
अब मेकर-चेकर की होगी दोहरी निगरानी
डीजीपी के नए निर्देशों के अनुसार ऑनलाइन वेतन देयक तैयार करने की जिम्मेदारी वेतन लिपिक की होगी, जिसे मेकर की भूमिका दी गई है। देयक में दर्ज सभी प्रविष्टियों और परिलब्धियों की शुद्धता सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी होगी। इसके बाद चेकर कुल भुगतान राशि, कर्मचारियों की संख्या और पिछले महीने की तुलना में वेतन तथा भत्तों में हुए बदलावों का परीक्षण करेगा। जांच के बाद ही बिल फाइनल किया जा सकेगा।
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डीडीओ की जवाबदेही भी तय
वेतन बिल को अंतिम रूप देने के बाद उसकी हार्डकापी और कोषालय वाउचर सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। डीजीपी ने आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) की जिम्मेदारी भी स्पष्ट की है। निर्देशों में जोर दिया गया है कि वित्तीय नियंत्रण केवल कागजी प्रक्रिया न बने, बल्कि प्रत्येक पुलिस इकाई में उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।
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