अंबिकापुर के अस्पताल में फर्जी डॉक्टर का भंडाफोड़, दूसरे की डिग्री पर ICU में कर रहा था इलाज, QR से खुली पोल
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- अंबिकापुर के श्री महावीर अस्पताल में फर्जी डॉक्टर पकड़ाया।
- क्यूआर कोड स्कैन करने पर दूसरे की निकली मेडिकल डिग्री।
- कलेक्टर के निर्देश पर एफआईआर दर्ज, जांच में जुटी पुलिस।
,अंबिकापुर: कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जिले के निजी अस्पतालों में संचालित जांच अभियान में गड़बड़ी सामने आ रही है। जांच के दौरान श्री महावीर हॉस्पिटल गांधीनगर में दूसरे की डिग्री के आधार पर मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में डा नुरैल आलम नामक व्यक्ति के विरुद्ध प्राथमिकी हुई है। अस्पताल में आउटसोर्सिंग के माध्यम से सिपाका कंपनी द्वारा गहन चिकित्सा इकाई (आइसीयू) का संचालन किया जाता है। इसी कंपनी द्वारा फर्जी डिग्री वाले कथित चिकित्सक की सेवाएं अस्पताल के आइसीयू में उपलब्ध कराई जा रही थी।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा 16 अक्टूबर 2026 को श्री महावीर हॉस्पिटल साई मंदिर के पास गांधीनगर का निरीक्षण किया गया था। यह निरीक्षण कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर किया गया था, जिसमें चिकित्सकों की डिग्री, पंजीयन प्रमाण पत्र और अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का परीक्षण किया गया।
क्यूआर कोड स्कैन करते ही खुली पोल
निरीक्षण दल को अस्पताल प्रबंधन ने वहां कार्यरत चिकित्सकों की शैक्षणिक योग्यता और पंजीयन से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए। दस्तावेजों की सूक्ष्मता से जांच करने पर अस्पताल में कार्यरत डा नुरैल आलम पिता शेख आरिफ के पंजीयन प्रमाण पत्र में गड़बड़ी पाई गई। प्रमाण पत्र पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह प्रमाण पत्र अमरेश कुमार पिता अभिनंदन कुमार निवासी महुआटोली लालगंज, पोस्ट सुगुन थाना खेलागांव रांची झारखंड का होना पाया गया।
इससे स्पष्ट हुआ कि डॉ. नुरैल आलम ने अमरेश कुमार की डिग्री में कूटरचना कर स्वयं के नाम से उपयोग किया है। जांच में यह भी सामने आया कि डा नुरैल आलम को सिपाका हेल्थ केयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा आउटसोर्स के माध्यम से श्री महावीर हॉस्पिटल में कार्य करने के लिए उपलब्ध कराया गया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर द्वारा अनुमोदन के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा जेआर सरुता ने थाना प्रभारी गांधीनगर को पत्र लिखकर प्राथमिकी दर्ज करने अनुशंसा की थी। पत्र के आधार पर थाना गांधीनगर में धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता के तहत डा नुरैल आलम के विरुद्ध केस दर्ज किया गया है।
निरीक्षण, खुलासा, आउटसोर्सिंग और पुलिस कार्रवाई
औचक निरीक्षण: कलेक्टर के निर्देश पर 16 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों का सत्यापन किया।
क्यूआर कोड से खुलासा: डॉ. नुरैल आलम की डिग्री के क्यूआर कोड को स्कैन करने पर वह रांची के अमरेश कुमार की निकली।
कंपनी की भूमिका: सिपाका हेल्थ केयर कंपनी ने आउटसोर्सिंग के जरिए फर्जी डॉक्टर को आईसीयू में सेवाएं देने के लिए रखा था।
एफआईआर दर्ज: सीएमएचओ की रिपोर्ट पर गांधीनगर थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज किया गया।
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