उस ‘फ़रिश्ते’ की तलाश कर रही हूँ जिसने मुझे वेस्टमिंस्टर ब्रिज पर संभाला था

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एक अनजानी शाम, एक अनमोल सहारा

लंदन की वह ठंडी शाम आज भी मेरे दिल के किसी कोने में सुरक्षित है। आसमान में हल्की धुंध थी, सामने बहती River Thames की लहरें शहर की रौशनी को अपने भीतर समेट रही थीं। दूर संसद भवन और घड़ी टॉवर की परछाइयाँ पानी में झिलमिला रही थीं। मैं Westminster Bridge पर खड़ी थी—पर मन के भीतर गहरा सन्नाटा था।

भीड़ थी, शोर था, पर मेरे भीतर सब कुछ खाली-सा लग रहा था।


वह पल जब कदम डगमगाए

दिन भर की थकान, अकेलेपन का बोझ और अनकहे डर—सब मिलकर मुझे कमजोर बना चुके थे। अचानक चक्कर-सा आया। आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा और मेरे कदम लड़खड़ा गए। पुल की रेलिंग से टकराकर शायद मैं गिर ही जाती…

तभी किसी ने पीछे से मुझे मजबूती से थाम लिया।

एक सधी हुई आवाज़ मेरे कानों में पड़ी—
“Are you alright?”

उसकी आवाज़ में घबराहट नहीं, अपनापन था। उसने मुझे धीरे से पास की जगह पर बैठाया, पानी दिया और तब तक वहीं खड़ा रहा जब तक मेरी साँसें सामान्य नहीं हो गईं।


अनजान चेहरा, पहचान बन गई

मैंने पहली बार उसकी ओर ठीक से देखा—एक साधारण-सा चेहरा, पर आँखों में असाधारण संवेदनशीलता। उसने पूछा कि क्या किसी को फोन करना है, क्या डॉक्टर बुलाना है। मैंने सिर हिलाकर ‘नहीं’ कहा, पर भीतर से जानती थी कि उस क्षण अगर वह साथ न होता, तो शायद स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

मैंने उसका नाम पूछना चाहा।
वह हल्का-सा मुस्कुराया और बोला,
“Take care of yourself.”

और फिर भीड़ में कहीं खो गया।

न कोई परिचय, न कोई संपर्क—बस एक मददगार हाथ, जिसने मुझे गिरने से बचा लिया।


क्यों तलाश है उस फ़रिश्ते की?

आज भी जब मैं उस शाम को याद करती हूँ, तो मन कृतज्ञता से भर जाता है। वह मेरे लिए कोई अजनबी नहीं, एक ‘फ़रिश्ता’ है—क्योंकि उसने बिना किसी स्वार्थ के मेरी मदद की।

इस दुनिया में जहाँ लोग अक्सर अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं, वहाँ किसी अनजान लड़की को संभालना, उसकी चिंता करना—यह सिर्फ इंसानियत नहीं, करुणा का सबसे सुंदर रूप है।


एक छोटी-सी उम्मीद

अगर आप यह लेख पढ़ रहे हैं—और आप वही व्यक्ति हैं जिसने मुझे Westminster Bridge पर संभाला था—तो जान लीजिए, मैं आज भी आपकी आभारी हूँ।
आपने सिर्फ मुझे गिरने से नहीं बचाया, बल्कि मेरे भीतर इंसानियत पर विश्वास भी मजबूत किया।

और अगर आप वह नहीं भी हैं, तो भी याद रखिए—
कभी-कभी किसी की ज़िंदगी में फ़रिश्ता बनने के लिए सिर्फ एक सहारा, एक संवेदनशील शब्द और एक सच्चा दिल ही काफी होता है।

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