शॉपिंग सेवा पर Google पर रिकॉर्ड EU जुर्माना लगाया गया

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Google की Shopping service पर EU का रिकॉर्ड जुर्माना, जानिए पूरा मामला

यूरोपीय संघ (EU) ने Google पर अपनी Shopping service को search results में अनुचित प्राथमिकता देने के मामले में रिकॉर्ड जुर्माना लगाया है। यूरोपीय आयोग के अनुसार, Google ने अपनी comparison shopping service को ऊपर दिखाकर प्रतिस्पर्धी सेवाओं को नुकसान पहुँचाया, जिसे बाजार में अनुचित व्यवहार माना गया।

इस मामले को यूरोपीय competition law में एक ऐतिहासिक फैसला माना गया, क्योंकि अदालत ने भी बाद में इस जुर्माने को बरकरार रखा। 10 सितंबर 2024 को European Court of Justice (CJEU) ने Google की appeal खारिज कर दी और 2.42 अरब यूरो के fine को final रूप से uphold कर दिया।

क्या था आरोप?

यूरोपीय आयोग ने कहा कि Google ने अपनी general search results pages पर अपनी shopping comparison service को rival comparison shopping services की तुलना में बेहतर position और display दिया। आयोग के मुताबिक, यह Article 102 TFEU और EEA Agreement के Article 54 का उल्लंघन था, क्योंकि एक dominant company को अपने services को इस तरह favor नहीं करना चाहिए कि competition distort हो जाए।

आयोग का मानना था कि Google ने search engine market में अपनी dominance का इस्तेमाल करके अपने shopping product को लाभ पहुँचाया। इससे users को search results में Google की service ज्यादा दिखाई दी और दूसरी कंपनियों की visibility कम हुई।

जुर्माना कितना था?

यूरोपीय आयोग ने Google और उसकी parent company Alphabet पर 2.42 अरब यूरो का जुर्माना लगाया था। यह उस समय European competition authorities द्वारा लगाए गए सबसे बड़े fines में से एक था, इसलिए इसे “record fine” कहा गया।

आयोग ने Google को यह भी आदेश दिया था कि वह 90 दिनों के भीतर अपने anti-competitive behavior को बंद करे, वरना अतिरिक्त दंड लगाया जा सकता था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुपालन न करने पर Alphabet की average daily worldwide earnings का 5% तक penalty लगने की संभावना भी बताई गई थी।

अदालत ने क्या कहा?

Google ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन 2021 में General Court ने आयोग के निर्णय को लगभग पूरी तरह बरकरार रखा। बाद में 2024 में European Court of Justice ने भी Google की अंतिम appeal खारिज कर दी, जिससे यह फैसला पूरी तरह final हो गया।

अदालतों ने यह माना कि dominant कंपनी द्वारा अपने ही service को search results में preferential treatment देना, कुछ परिस्थितियों में, abuse of dominance बन सकता है। इस फैसले ने “self-preferencing” को EU competition law में एक गंभीर issue के रूप में और मजबूत कर दिया।

इसका असर क्या हुआ?

इस फैसले का असर सिर्फ Google तक सीमित नहीं रहा। EU ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए यह साफ संदेश दिया कि market dominance का उपयोग करके own products को unfair advantage देना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

यह मामला आने वाले समय में अन्य बड़ी टेक कंपनियों के लिए भी precedent बन गया, खासकर तब जब search, app stores, shopping, travel, या local services जैसे क्षेत्रों में प्लेटफॉर्म अपने ही products को आगे बढ़ाते हैं।

क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?

यह केस इसलिए खास है क्योंकि इसने दिखाया कि digital markets में competition rules कितने सख्त हो सकते हैं। Google Shopping case के जरिए EU ने यह स्थापित किया कि अगर कोई कंपनी अपनी dominance का इस्तेमाल करके search results को manipulate करती है, तो वह competition law के तहत दंडनीय हो सकती है।

यह फैसला technology companies, regulators और startups तीनों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे यह संदेश गया कि online visibility और ranking सिर्फ तकनीकी मुद्दे नहीं हैं, बल्कि business competition और consumer choice से सीधे जुड़े हुए हैं

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