‘किसी ने नकदी का ढेर जलाने की धमकी दी’
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शहर की सबसे व्यस्त सड़क पर उस सुबह एक रहस्यमयी पोस्टर लगा मिला। उस पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था—
“यदि मेरी बात नहीं मानी गई, तो आज शाम 6 बजे मैं करोड़ों रुपये की नकदी का ढेर सबके सामने जला दूँगा।”
पोस्टर देखते ही पूरे शहर में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया पर यह खबर आग की तरह फैल गई। कुछ लोगों ने इसे मज़ाक समझा, तो कुछ ने इसे किसी बड़े विरोध का तरीका बताया। पुलिस और प्रशासन तुरंत सक्रिय हो गए।
शाम होने से पहले ही शहर के मुख्य मैदान में भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस की कई टीमें तैनात थीं। ठीक छह बजे एक व्यक्ति काले कपड़ों में वहां पहुँचा। उसके सामने नोटों जैसा दिखने वाला एक बड़ा ढेर रखा था। उसने माचिस निकाली और कहा,
“आज मैं सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि लालच की उस सोच को जलाना चाहता हूँ, जिसने इंसानियत को पीछे छोड़ दिया है।”
भीड़ में सन्नाटा छा गया। पुलिस अधिकारी आगे बढ़े और उसे रोकने की कोशिश की। तभी उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए ढेर में आग लगा दी।
कुछ ही सेकंड में लोगों को समझ आ गया कि वह असली नकदी नहीं थी। वे फिल्म की शूटिंग में इस्तेमाल होने वाले नकली नोट थे। असली मकसद लोगों का ध्यान एक सामाजिक संदेश की ओर आकर्षित करना था।
उस व्यक्ति ने कहा,
“आज लोग रिश्तों से ज्यादा पैसों की कीमत समझने लगे हैं। यदि धन इंसान की सेवा करे तो वह वरदान है, लेकिन यदि इंसान धन का गुलाम बन जाए, तो वही धन सबसे बड़ा अभिशाप बन जाता है।”
उसके शब्द सुनकर मैदान में मौजूद लोग तालियाँ बजाने लगे। पुलिस ने भी राहत की सांस ली कि कोई कानून नहीं टूटा और किसी सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ।
अगले दिन शहर के हर अखबार की सुर्खी थी—
“नकदी जलाने की धमकी निकली एक सामाजिक जागरूकता मुहिम, जिसने लोगों को धन से अधिक मानवता का महत्व याद दिलाया।”
