मिल गया ब्रह्मांड का एक और बर्फीला चंद्रमा, जिसकी सतह में छिपा है विशालकाय महासागर |…

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मिल गया ब्रह्मांड का एक और बर्फीला चंद्रमा, जिसकी सतह में छिपा है विशालकाय महासागर |…
मिल गया ब्रह्मांड का एक और बर्फीला चंद्रमा, जिसकी सतह में छिपा है विशालकाय महासागर

शनि ग्रह के इस चंद्रमा पर मिला पानीImage Credit source: प्रतीकात्मक तस्वीर (Pixabay)

ब्रह्मांड में पृथ्वी के अलावा इंसानों के रहने लायक अन्य ग्रहों की तलाश जारी है, लेकिन अब तक इसमें कोई खास सफलता नहीं मिल पाई है, पर कुछ ग्रहों के चंद्रमा ऐसे हैं, जहां जीवन की संभावना जताई जाती है. ऐसा माना जाता है कि उन चंद्रमाओं पर पृथ्वी की तरह ही विशालकाय महासागर हैं, जहां जीवन हो भी सकता है और नहीं भी. वैज्ञानिकों ने ऐसे ही एक चंद्रमा का पता लगाया है, जिसको लेकर दावा किया जा रहा है कि उसकी सतह पर विशालकाय गड्ढे हैं, जो स्टार वॉर्स के डेथ स्टार की तरह दिखाई देते हैं और यहां एक छिपा हुआ महासागर है, जो इसकी परत के नीचे मीलों तक दबा हुआ है.

शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि ये शनि ग्रह का एक चंद्रमा है, जिसका नाम मीमास है. यह शनि का सातवां, जबकि पूरे सौरमंडल का 20वां सबसे बड़ा उपग्रह है और अब यह चंद्रमाओं के एक विशेष क्लब में शामिल हो गया है, जहां जमीन के नीचे महासागरों के दबे होने की आशंका है. शनि ग्रह के टाइटन और एन्सेलाडस, जबकि बृहस्पति ग्रह के यूरोपा और गेनीमेड नामक चंद्रमा पहले से ही इस समूह का हिस्सा हैं यानी इन चंद्रमाओं पर भूमिगत महासागर मौजूद हैं.

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मीमास पर है छिपा हुआ महासागर

वैज्ञानिकों के मुताबिक, मीमास 250 मील चौड़ा बर्फ का गोला है. मिमास की कक्षा की खासियतों को ध्यान में रखते हुए खगोलविदों ने दो संभावनाएं निकाली हैं. उनका कहना है कि या तो इस चंद्रमा के आंतरिक महासागर ने इसके बाहरी आवरण को कोर से स्वतंत्र रूप से शिफ्ट करने में मदद की है या इसमें बर्फ से ढका एक लंबा कोर हो सकता है. फ्रांस के खगोलशास्त्री वालेरी लैनी और उनके सहयोगियों ने हाल ही में एक अध्ययन किया है और दावा किया है कि शनि के इस चंद्रमा पर एक छिपा हुआ महासागर है. इसका पता लगाने के लिए उन्होंने नासा के कैसिनी मिशन द्वारा शनि पर ली गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया.

45 मील गहरा है ये महासागर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने कहा कि ये महासागर 45 मील गहरा है और मिमास के 15 मील मोटे बर्फीले खोल के नीचे छिपा हुआ है. अब यहां जीवन है या नहीं, इसको लेकर वैज्ञानिक स्पष्ट नहीं हैं, पर उनकी खोज लगातार चल रही है.

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