बस्तर में मलेरिया से बचाव के लिए 68 करोड़ मिले, कांकेर में 10 दिन में 3 बच्चों की मौत के बाद भी मेडिकेटेड मच्छरदानी नहीं
बस्तर में मलेरिया के 8426 केस HighLights
- बस्तर में मलेरिया से बचाव के लिए 68 करोड़
- केंद्र से फंड मिलने पर भी नहीं मिली मच्छरदानी
- CGMSC ने नहीं बनाए निविदा के दस्तावेज
, रायपुर। बस्तर में मलेरिया से बचाव के लिए पैसे की कमी नहीं है, कमी है तो खरीदी की प्रक्रिया में तेजी की। दो महीने पहले केंद्र सरकार 68 करोड़ रुपये दे चुकी है। मलेरिया नियंत्रण अभियान का 14वां चरण भी चल रहा है, लेकिन ग्रामीणों को मच्छरों से बचाने वाली मेडिकेटेड मच्छरदानियां अब तक नहीं मिल पाई हैं। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कारपोरेशन (CGMSC) ने निविदा के दस्तावेज तक तैयार नहीं किए हैं।
संभाग में इस साल अब तक 8,426 लोग मलेरिया की चपेट में आ चुके हैं। कांकेर में जुलाई माह में 10 दिन के भीतर तीन स्कूली बच्चों की मौत ने खतरे की गंभीरता को और बढ़ा दिया था। बच्चों की मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर चुका है। बारिश के मौसम में जब मच्छरों का प्रकोप ज्यादा होता है, उस दौरान भी मच्छरदानी की खरीदी फंड होने के बाद भी नहीं हो सकी।
तीन साल से टूटी है खरीदी-वितरण की कड़ी
बस्तर के ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मच्छरदानी मलेरिया से बचाव का महत्वपूर्ण साधन है। पहले ग्रामीण इलाकों में लाखों मेडिकेटेड मच्छरदानियां बांटी जाती थीं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2024 के बाद से वितरण नहीं हुआ है।
इस बार खरीदी CGMSC के माध्यम से की जानी है। केंद्र से 68 करोड़ रुपये मिलने के बावजूद निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। निगम में तैनात निजी कंपनी के कंसल्टेंटों ने निविदा दस्तावेज तैयार नहीं किए हैं। यानी खरीदी की शुरुआती प्रक्रिया ही लंबित है। जब तक निविदा, आपूर्ति और वितरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक बजट का ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।
कांकेर में 10 दिन में हुई थी तीन बच्चों की मौत
करीब चार माह पहले कांकेर जिले के मर्दापोटी बालक आश्रम में पढ़ने वाले नौ वर्षीय सुभाष कुमेटी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इससे पहले दो अन्य स्कूली बच्चे भी मलेरिया से जान गंवा चुके हैं। तीनों मौतें महज 10 दिनों के भीतर हुई थीं।
जानकारी के अनुसार, 22 से 24 जुलाई के बीच आश्रम में स्वास्थ्य जांच के दौरान नौ बच्चे मलेरिया संक्रमित मिले थे। बाद में गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाने पर सुभाष को बचाया नहीं जा सका। मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान के 14वें चरण के बावजूद संक्रमण के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़ों में बीजापुर सबसे अधिक प्रभावित जिला है। इसके बाद सुकमा और दंतेवाड़ा का स्थान है।
मेडिकेटेड मच्छरदानियां खरीदने की प्रक्रिया की जा रही है। दवा निगम इसके लिए तैयारी कर रहा है। जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा।
-रीतेश अग्रवाल, एमडी, सीजीएमएससी
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