नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। दशकों से माओवादी हिंसा का सामना कर रहे बस्तर में अब विकास की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है। केंद्र सरकार ने लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म (LWE) प्रभावित क्षेत्रों के लिए जिला खनिज न्यास निधि (DMF) के नियमों में विशेष छूट दी है। इसके तहत खनिज वाले जिलों में जमा होने वाली DMF राशि को अब दूरदराज के संवेदनशील और पिछड़े क्षेत्रों में भी खर्च किया जा सकेगा।
यह विशेष व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2027-28 तक लागू रहेगी। इसका लाभ बीजापुर, सुकमा, नारायणपुर और कांकेर को मिलेगा। इन इलाकों में अब पक्की सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का रास्ता खुला है।
दंतेवाड़ा के DMF फंड का 50% चार जिलों को
राज्य को हर साल कोरबा से लगभग 700 करोड़ रुपये और दंतेवाड़ा से करीब 600 करोड़ रुपये का DMF फंड मिलता है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 16,738 करोड़ रुपये का खनिज राजस्व जुटाया गया। अगले वित्तीय वर्ष में इसके 19,000 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
भौमिकी एवं खनिकर्म विभाग के संचालक रजत बंसल के अनुसार, दंतेवाड़ा के कुल DMF फंड का 50 फीसदी हिस्सा अब सीधे बीजापुर, नारायणपुर, सुकमा और कांकेर को वितरित किया गया है।
2028 से पहले विकास पर जोर
माओवादी गतिविधियों में कमी के बाद अब बस्तर में सरकार के सामने विकास और लोगों का भरोसा मजबूत करने की चुनौती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केवल सुरक्षा कैंप स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली, 4जी/5जी नेटवर्क, पोर्टा केबिन स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाएं पहुंचाना भी जरूरी है।
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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पहले ही कह चुके हैं कि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले बस्तर के हर गांव तक विकास की रोशनी पहुंचाना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। DMF नियमों में मिली यह छूट इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।