नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में मुकदमों के त्वरित निपटारे के बावजूद पेंडेंसी का आंकड़ा अब भी 72 हजार से अधिक बना हुआ है। 31 अगस्त 2026 की स्थिति में हाई कोर्ट में कुल 72,361 मामले लंबित थे। इनमें सबसे बड़ा बोझ सिविल और रिट मामलों का है, जबकि अलग-अलग श्रेणियों में सर्विस मैटर और क्रिमिनल अपील की लंबित संख्या भी 13 हजार से अधिक है।
हाई कोर्ट द्वारा सितंबर महीने में जारी की गई हाई कोर्ट में लंबित मामलों की अपडेट रिपोर्ट में इसे स्पष्ट किया गया है। अगस्त की शुरुआत में हाई कोर्ट में कुल 73,439 मामले लंबित थे। महीने में 4,031 नए मामले दाखिल हुए, जबकि 5,158 मामलों का निराकरण किया गया। इस तरह नए मामलों की तुलना में 1,127 अधिक मामलों का फैसला हुआ और कुल पेंडेंसी में 1,078 मामलों की शुद्ध कमी दर्ज की गई।
31 अगस्त तक सिविल और रिट श्रेणी में 49,544 मामले लंबित थे। अगस्त की शुरुआत में यह संख्या 50,670 थी। इस दौरान 2,037 नए मामले आए, जबकि 3,211 का निपटारा हुआ। इससे इस श्रेणी की पेंडेंसी में 1,126 मामलों की कमी आई। क्रिमिनल मामलों में इसके विपरीत मामूली वृद्धि हुई। एक अगस्त को 22,769 मामले लंबित थे। महीने में 1,994 नए मामले दाखिल हुए, जबकि 1,947 का निपटारा हुआ। इसके चलते 31 अगस्त को क्रिमिनल पेंडेंसी बढ़कर 22,817 हो गई।
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सर्विस मैटर में 13,333 मामले
हाई कोर्ट की लंबित मामलों की प्रमुख श्रेणियों में सर्विस मैटर (डब्ल्यूपीएस) भी शामिल है। नियुक्ति, पदोन्नति, वेतन, स्थानांतरण और सेवा समाप्ति जैसे विवादों से जुड़े 13,333 मामले लंबित हैं। हालांकि अगस्त में इस श्रेणी के 1,121 मामलों का निपटारा किया गया।
क्रिमिनल अपील के 13,767 मामले
क्रिमिनल अपील (सीआरए) में भी पेंडेंसी बड़ी चुनौती है। इस श्रेणी में 13,767 मामले लंबित हैं। वहीं जमानत याचिकाओं (एमसीआरसी) में अगस्त के दौरान 1,129 नए मामले दाखिल हुए और 1,029 का निपटारा किया गया।
पुराने मामलों पर भी फोकस
पांच साल से अधिक पुराने मामलों की संख्या भी अगस्त में घटी। एक अगस्त को ऐसे 21,450 मामले लंबित थे, जो महीने के अंत तक घटकर 20,809 रह गए। यानी 641 पुराने मामलों का निपटारा हुआ। आंकड़े बताते हैं कि कुल पेंडेंसी घटाने के साथ पुराने मामलों के निराकरण पर भी हाई कोर्ट का जोर रहा, लेकिन 72,361 लंबित मामलों का आंकड़ा अब भी बड़ी चुनौती है।