रायपुर एयरपोर्ट समेत देश के 11 हवाई अड्डों के निजीकरण की तैयारी, पांच समूहों में 50 वर्ष की लीज

स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा। फोटो सौजन्य सोशल मीडिया।
HighLights
- चयन एएआई ने आंकड़ा आधारित प्रक्रिया से किया
- समूहों में बड़े और छोटे हवाई अड्डों को साथ रखा गया है
- प्रत्येक समूह के सभी हवाई अड्डों का संचालन एक ही कंपनी करेगी
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर, भुवनेश्वर, वाराणसी और तिरुपति समेत देश के 11 हवाई अड्डों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी है। नागर विमानन मंत्रालय ने इन्हें पांच समूहों में बांटकर 50 वर्ष के लिए लीज पर देने का प्रस्ताव रखा है।
प्रत्येक समूह के सभी हवाई अड्डों का संचालन एक ही कंपनी करेगी। पीपीपी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) ने चार अगस्त की बैठक में प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दी है।
समूहों में बड़े और छोटे हवाई अड्डों को साथ रखा गया है
सरकार का लक्ष्य निजी भागीदारी से हवाई अड्डों का विकास और संचालन बेहतर करना है। समूहों में बड़े और छोटे हवाई अड्डों को साथ रखा गया है। रायपुर और औरंगाबाद, जबकि भुवनेश्वर और हुबली को अलग-अलग समूहों में शामिल किया गया है।
निजी संचालकों से कुल 8,622 करोड़ रुपये निवेश की उम्मीद है। बाजार में केंद्रीकरण और अत्यधिक कर्ज के जोखिम को देखते हुए एक बोलीदाता के लिए समूहों की संख्या सीमित की जाएगी।
ऐसे बनाए गए पांच समूह
अमृतसर और कांगड़ा-गग्गल को पहले, वाराणसी, गया और कुशीनगर दूसरे, भुवनेश्वर और हुबली को तीसरे, रायपुर और औरंगाबाद को चौथे और तिरुचिरापल्ली और तिरुपति को पांचवें समूह में रखा गया है।
कर्मचारियों के लिए तीन वर्ष की व्यवस्था
हवाई अड्डों के निजीकरण के बाद एएआई के कर्मचारियों को लेकर भी व्यवस्था प्रस्तावित है। मंत्रालय ने निजी संचालक के साथ एक वर्ष की संयुक्त प्रबंधन अवधि रखने का सुझाव दिया है। इसके बाद परिचालक कंपनी को तीन वर्ष तक भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 60 प्रतिशत कर्मचारियों को बनाए रखना होगा।
चयन एएआई ने आंकड़ा आधारित प्रक्रिया से किया
सरकार के अनुसार, पिछले अनुभवों में ऐसी व्यवस्था कर्मचारियों को स्वीकार्य रही है। मौजूदा दौर के लिए 11 हवाई अड्डों का चयन एएआई ने आंकड़ा आधारित प्रक्रिया से किया। पहले 12 बड़े हवाई अड्डों का यात्री यातायात, भूमि, व्यावसायिक क्षमता और वित्तीय प्रदर्शन के आधार पर आकलन किया गया। इसके बाद 136 छोटे हवाई अड्डों को बड़े हवाई अड्डों के साथ समूह बनाने की संभावना पर परखा गया।
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