नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। खारुन नदी के सात एनीकट लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। बीते पांच साल में सातपाखर, काठाडीह, मुजगहन, मुर्रा, मुंडरा, उरला और सोनडोंगरी एनीकट में 429 से अधिक लोगों की डूबने से मौत हो चुकी है। इनमें करीब 80 प्रतिशत मामले शहरी क्षेत्र से जुड़े बताए जा रहे हैं।
सबसे ज्यादा हादसे जुलाई, अगस्त और सितंबर में होते हैं। इसी अवधि में नदी-तालाबों में डूबने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। एसडीआरएफ की टीम ने पांच साल में 671 लोगों को डूबने से बचाया है, लेकिन जिन घटनाओं की सूचना टीम तक नहीं पहुंची, उनका कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
ब्लैक स्पॉट घोषित नहीं किया
इसके बावजूद इन खतरनाक स्थलों को अब तक ब्लैक स्पाट घोषित नहीं किया गया है। कई जगह चेतावनी बोर्ड तक नहीं लगे हैं। यानी हादसों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और रोकथाम की व्यवस्था अभी भी पीछे है।
तीन महीने सबसे भारी, हर साल 100 से 150 घटनाएं
एसडीआरएफ के अनुसार पानी में डूबने की घटनाएं वर्षा ऋतु के तीन महीनों में सबसे ज्यादा होती हैं। जुलाई से सितंबर के बीच हर साल औसतन 100 से 150 मामले सामने आते हैं। समय पर सूचना मिलने पर बचाव दल कई लोगों की जान बचा लेता है।
नशे में उतरने वाले ज्यादा
विशेषज्ञों के अनुसार डूबने वालों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिन्हें तैरना नहीं आता या जो शराब के नशे में पानी में उतरते हैं। नदी के तेज बहाव, फिसलन, शैवाल और गहराई के कारण नहाने गए लोगों के लिए स्थिति अचानक खतरनाक हो जाती है।
एनीकट अलग, खतरा अलग
सातपाखर में हर साल औसतन 30 मौतें बताई गई हैं। पानी का लगातार बहाव, नीचे खिसकी मिट्टी और शैवाल यहां बड़ा खतरा हैं। पांच साल में 150 से ज्यादा मौतें हुईं। काठाडीह में हर साल 8-10 लोग डूबते हैं। पाइप से आने वाली धार के टकराने से पानी में भंवर बनता है। मुजगहन में भी सालाना 8-10 मौतें और पांच साल में 50 से अधिक मौतें बताई गई हैं। मुर्रा में 45-50, मुंडरा में करीब 48, उरला में 30 से अधिक और सोनडोंगरी में 40 से ज्यादा मौतों का आंकड़ा सामने आया है।
पिकनिक, नहाना और नशे का जानलेवा मेल
इन एनीकटों के आसपास पिकनिक मनाने वालों की भीड़ भी पहुंचती है। गर्मी और बारिश के दिनों में लोग पानी में उतरकर नहाते हैं, जबकि कई मामलों में शराब के नशे में नदी में जाना हादसे का कारण बनता है। उरला एनीकट अपेक्षाकृत गहरा है और यहां उद्योगों को पानी देने के लिए अधिक पानी रोका जाता है। मुर्रा और मुंडरा में नदी की मिट्टी खिसकने से नीचे गहरी खोल जैसी संरचना बन गई है, जिसमें पैर फंसने पर बाहर निकलना मुश्किल होता है। सोनडोंगरी में गहराई और पानी के नीचे मौजूद शैवाल जोखिम बढ़ाते हैं।
मौतें रोकने के लिए पहले चेतावनी जरूरी
सात एनीकटों पर लगातार हादसे होने के बावजूद अब तक स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आती। जिन स्थानों पर हर साल लोग डूब रहे हैं, वहां चेतावनी बोर्ड, खतरे वाले हिस्सों की पहचान और लोगों को पानी में उतरने से रोकने की व्यवस्था जरूरी है। खासकर बारिश के तीन महीनों में इन स्थानों पर निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। केवल हादसे के बाद बचाव दल पहुंचाने के बजाय ऐसे स्थानों पर पहले से रोकथाम की व्यवस्था हो तो कई जानें बचाई जा सकती हैं।
थानों को जानकारी दी
“जिन स्थानों पर पानी में डूबने से लोगों की मौत हो रही है, उन्हें ब्लैक स्पॉट घोषित करने के लिए संबंधित थाना और अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है। इन स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने के सुझाव भी लगातार दिए जा रहे हैं। बारिश के दौरान ऐसे स्थानों पर हादसों की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए लोगों को भी गहरे पानी में जाने और नशे की हालत में नदी में उतरने से बचना चाहिए।”
– पुष्पराज सिंह, जिला अग्निशमन अधिकारी
सुनिश्चित किए जाएंगे सुरक्षा उपाय
“जिन स्थानों पर पानी में डूबने से लोगों की मौत हो रही है, वहां नियमानुसार आवश्यक व्यवस्था बनाने का पूरा प्रयास किया जाएगा। संबंधित विभागों से ऐसे स्थानों की जानकारी लेकर सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित किए जाएंगे। लोगों को भी नदी और एनीकट के खतरनाक हिस्सों में जाने से बचना चाहिए। बारिश के दौरान जलस्तर और बहाव बढ़ने से खतरा और अधिक बढ़ जाता है।”
– डा. गौरव सिंह, कलेक्टर