📅 Tuesday, 20 October 2026 | विश्वसनीय और निष्पक्ष समाचार
ब्रेकिंग न्यूज़

बीमा कंपनी को देना होगा 20 लाख रुपये का मुआवजा, 6% ब्याज भी लगेगा; राष्ट्रीय आयोग ने पलटा फैसला

शेयर करें: 💬 WhatsApp f 𝕏 ✈️
बीमा कंपनी को देना होगा 20 लाख रुपये का मुआवजा, 6% ब्याज भी लगेगा; राष्ट्रीय आयोग ने पलटा फैसला

image

रायपुर. सड़क दुर्घटना में पति की मौत के बाद बीमा राशि के लिए वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाली छत्तीसगढ़ की महिला को आखिरकार राहत मिली है. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने बीमा कंपनी को 20 लाख रुपये की बीमा राशि देने का आदेश दिया है. इसके साथ ही निर्धारित अवधि के बाद 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी चुकाना होगा. आयोग ने जिला और राज्य उपभोक्ता आयोगों के पूर्व आदेशों को निरस्त करते हुए महिला के पक्ष में फैसला सुनाया.

यह मामला कबीरधाम जिले की बोड़ला तहसील के माराडबरा गांव की तिहारो चिचाम से जुड़ा है. उनके पति गणेश चिचाम का छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की बोड़ला शाखा में बचत खाता था. बैंक के माध्यम से एक हजार रुपये का प्रीमियम लेकर उनके नाम पर व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी जारी की गई थी. इस पॉलिसी के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर 20 लाख रुपये देने का प्रावधान था.

सड़क हादसे में हुई थी पति की मौत

जानकारी के मुताबिक, 19 नवंबर 2023 को गणेश चिचाम मोटरसाइकिल से तरेगांव जंगल से अपने गांव लौट रहे थे. इसी दौरान मछलीरवां मंदिर के पास सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई. घटना के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 304-ए के तहत मामला दर्ज किया था.

पति की मृत्यु के बाद तिहारो चिचाम ने बीमा कंपनी से पॉलिसी की राशि मांगी. हालांकि, कंपनी ने मृतक की कथित लापरवाही और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बीमा दावा खारिज कर दिया.

जिला और राज्य आयोग से नहीं मिली राहत

बीमा कंपनी के फैसले के खिलाफ तिहारो चिचाम ने जिला उपभोक्ता आयोग, कबीरधाम में शिकायत दर्ज कराई. लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली. इसके बाद राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की गई, जहां जिला आयोग का फैसला बरकरार रखा गया.

लगातार दो स्तरों पर निराशा मिलने के बाद महिला ने अधिवक्ता राजेश कुमार भावनानी के माध्यम से राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया.

जहरीला पदार्थ लेने के आरोप की नहीं हुई पुष्टि

राष्ट्रीय आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि मृतक की लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं थे. आयोग के अनुसार, केवल एफआईआर और पुलिस की खात्मा रिपोर्ट के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं था.

मामले में उपलब्ध रासायनिक परीक्षण रिपोर्ट में भी विषैले पदार्थ के सेवन की पुष्टि नहीं हुई थी. इन तथ्यों पर विचार करने के बाद आयोग ने निचले दोनों उपभोक्ता आयोगों के आदेश निरस्त कर दिए.

चार सप्ताह में भुगतान का निर्देश

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने 8 अक्टूबर 2026 को दिए आदेश में तिहारो चिचाम को बीमा पॉलिसी के तहत 20 लाख रुपये पाने का हकदार माना. आयोग ने बीमा कंपनी को चार सप्ताह के भीतर बीमा राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया है. साथ ही मृत्यु की तारीख से छह महीने बाद की अवधि से 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का आदेश भी दिया गया है.

इस फैसले से बीमा दावा खारिज होने के बाद न्याय के लिए संघर्ष कर रही महिला को बड़ी राहत मिली है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *