छत्तीसगढ़ में TET के विरोध में 33 जिलों में सड़क पर उतरे शिक्षक, कई स्कूलों में लटके ताले, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

शासकीय प्राथमिक शाला माटवाड़ा लाल (बडे पारा), जिला कांकेर में लटका ताला।
HighLights
- छत्तीसगढ़ के शिक्षकों का हल्लाबोल
- सीएम और शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
- 20-25 साल की सेवा के बाद TET क्यों?
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। शिक्षकों को TET से राहत देने और सेवा सुरक्षा व पदोन्नति सहित पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मंगलवार को प्रदेशभर में शिक्षक सड़क पर उतरे। छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 33 जिला मुख्यालयों में ‘TET मुक्ति रैली’ निकाली गई। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की।
आंदोलन का असर स्कूलों की पढ़ाई पर भी पड़ा। कई स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित रहीं, जबकि वनांचल क्षेत्रों के अनेक स्कूलों में ताले लटके रहे। कुछ स्कूलों में शिक्षक नहीं होने के कारण बच्चे कक्षा से बाहर नजर आए।
सेवा सुरक्षा और पदोन्नति की मांग
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संयोजक वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा और केदार जैन ने कहा कि लंबे समय तक सेवा देने के बाद अब TET की अनिवार्यता से उन्हें सेवा सुरक्षा और पदोन्नति को लेकर असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों को TET संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है।
इसी अवधि को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के लिए विशेष विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की है। शिक्षकों का दावा है कि छत्तीसगढ़ में भी इस तरह की व्यवस्था को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से चर्चा की गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में गंभीर निर्णय नहीं लिया गया है।
20-25 साल सेवा के बाद परीक्षा पर नाराजगी
शिक्षक नेताओं का कहना है कि 20 से 25 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों के लिए टेट की अनिवार्यता व्यावहारिक नहीं है। उनका तर्क है कि वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों की सेवा, पदोन्नति और भविष्य को परीक्षा से जोड़ना उचित नहीं है। इसी मुद्दे को लेकर प्रदेशभर में शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है। पांच सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब व्यापक रूप लेने लगा है।
जनप्रतिनिधियों से करेंगे चर्चा
छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय संयोजक वीरेंद्र दुबे, संजय शर्मा और केदार जैन ने कहा कि राज्य के जनप्रतिनिधियों को शिक्षकों की समस्याओं और 20-25 वर्षों की सेवा के बाद थोपे जा रहे टेट परीक्षा के प्रविधान से अवगत कराया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर सेवा सुरक्षा, पदोन्नति और टेट से संबंधित मांगों पर निर्णय लेने का आग्रह करेगा।
आंदोलन आगे बढ़ाने की तैयारी
शिक्षक नेताओं ने कहा कि वर्तमान आंदोलन के माध्यम से प्रदेशभर के शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले एकजुट हुए हैं। आगे की रणनीति को लेकर तीनों प्रांतीय संयोजक आपस में चर्चा कर कार्यक्रम तय करेंगे। मांगों पर जल्द निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से प्रदेशभर में विस्तार देने की तैयारी है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर… 1 सितंबर से कराएं eKYC, आधार कार्ड और बिल में नाम का मिलान अनिवार्य
पढ़ाई प्रभावित होने पर उठे सवाल
शिक्षकों के आंदोलन के चलते कई स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है। विशेष रूप से वनांचल क्षेत्रों में इसका असर अधिक रहा, जहां कुछ स्कूलों में ताले लगे रहे। कई जगह बच्चे स्कूल तो पहुंचे, लेकिन शिक्षक नहीं होने से कक्षा के बाहर बैठे या घूमते नजर आए। ऐसे में शिक्षकों की मांगों के साथ-साथ आंदोलन के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का मुद्दा भी सामने आया है।
टेट परीक्षा को लेकर राज्य में तैयारी की जा रही है। मध्य प्रदेश की तर्ज पर प्रदेश में भी परीक्षा आयोजित करने की योजना है। इस संबंध में अध्ययन किया जा रहा है।- गजेंद्र यादव, स्कूल शिक्षा मंत्री