मेरिट में आने के बाद भी प्रशिक्षण अधिकारी की नियुक्ति रोकी, हाई कोर्ट ने कहा- 90 दिन में विचार करें

HighLights
- मेरिट में आने के बाद भी प्रशिक्षण अधिकारी की नियुक्ति रोकी
- हाई कोर्ट ने कहा- 90 दिन में विचार करें
- अंतरिम आदेश से नियुक्ति पर अपने आप रोक नहीं- हाई कोर्ट
, बिलासपुर। शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण अधिकारी (इलेक्ट्रीशियन) के पद पर चयन प्रक्रिया पूरी होने और दस्तावेजों का सत्यापन होने के बाद भी नियुक्ति नहीं मिलने पर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने जांजगीर-चांपा जिले के बरगांव निवासी राकेश कुमार करश के मामले में अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित श्रेणी के रिक्त पद के विरुद्ध उनकी नियुक्ति के दावे पर 90 दिन के भीतर विचार करें। पात्र और योग्य पाए जाने पर नियमानुसार नियुक्ति आदेश जारी किया जाए।
मेरिट में आने के बाद भी नियुक्ति लंबित
राकेश कुमार ने प्रशिक्षण अधिकारी (इलेक्ट्रीशियन) के पदों पर भर्ती के लिए जारी विज्ञापन के अनुसार आवेदन किया था। लिखित परीक्षा में सफल होने और मेरिट में स्थान पाने के बाद उन्हें दस्तावेज सत्यापन और काउंसलिंग के लिए बुलाया गया। अधिकारियों ने उनके दस्तावेज स्वीकार कर लिए, लेकिन नियुक्ति आदेश जारी नहीं किया गया। याचिका में उन्होंने नियुक्ति आदेश और कार्यभार ग्रहण कराने संबंधी पत्र जारी करने की मांग की थी।
दूसरे अभ्यर्थियों की याचिकाओं का दिया हवाला
राज्य सरकार ने जवाब में बताया कि भर्ती प्रक्रिया में अपात्र पाए गए कुछ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। इनमें कुछ मामलों में एक पद रिक्त रखने का अंतरिम आदेश दिया गया है। इसी वजह से राकेश कुमार की नियुक्ति रोककर रखी गई है। सरकार ने यह भी कहा कि उनकी उम्मीदवारी खारिज नहीं की गई है, बल्कि नियुक्ति पर रोक लगी हुई है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि सरकार का जवाब स्पष्ट नहीं है। उनके अनुसार, इलेक्ट्रीशियन के करीब 17 पद अब भी रिक्त हैं और कुछ याचिकाओं का निपटारा भी हो चुका है।
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अंतरिम आदेश से नियुक्ति पर अपने आप रोक नहीं
हाई कोर्ट ने कहा कि चयन सूची में शामिल होने मात्र से नियुक्ति का पूर्ण अधिकार नहीं मिल जाता। हालांकि, सरकार को भर्ती नियमों के अनुसार निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से निर्णय लेना होगा। किसी अभ्यर्थी की मेरिट अधिक होने के बावजूद उसे मनमाने ढंग से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार ने अपने जवाब के साथ उन मामलों का विवरण नहीं दिया, जिनमें पद रिक्त रखने के अंतरिम आदेश पारित किए गए हैं। ऐसे आदेशों के आधार पर ही याचिकाकर्ता की नियुक्ति अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखी जा सकती।
हाई कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे भर्ती नियमों और विज्ञापन की शर्तों के अनुसार राकेश कुमार की पात्रता की जांच कर उनकी श्रेणी के रिक्त पद के विरुद्ध नियुक्ति पर विचार करें। पात्र और योग्य पाए जाने पर नियुक्ति आदेश जारी किया जाए। यह प्रक्रिया प्रमाणित आदेश की प्रति प्राप्त होने या प्रस्तुत किए जाने से 90 दिन के भीतर पूरी करनी होगी।
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