रायपुर के बाजार में ग्राहकों को भ्रमित करने का खेल, ‘सूर्यवंश’ ब्रांड बेसन की नकल कर ‘सूर्यवंशी’ बनाया, दो पर FIR दर्ज
21 साल पुराने पंजीकृत ब्रांड का इस्तेमाल, HighLights
- 21 साल पुराने पंजीकृत ब्रांड का इस्तेमाल
- नकली बेसन बेचने पर दो पर मुकदमा दर्ज
- माना कैंप थाने में आज FIR दर्ज की गई
, रायपुर। राजधानी में बेसन के ब्रांड ‘सूर्यवंश’ की नकल कर ‘सूर्यवंशी’ नाम से उत्पाद बेचने पर माना कैंप पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ अपराध दर्ज किया है।
शिकायतकर्ता मनीष शादीजा ने आरोप लगाया है कि मेसर्स एमएस सिंध बेसन के संचालक धीरज सचदेव और उनके पिता निर्मल सचदेव ने उनके पंजीकृत ट्रेडमार्क के नाम, पैकेजिंग, सूर्य के चिह्न और टैगलाइन की नकल कर मिलते-जुलते नाम से बेसन बाजार में बेचा। पुलिस ने जांच के बाद ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।
माना कैंप थाने में 10 अक्टूबर को एफआईआर दर्ज की गई। प्राथमिकी में धीरज सचदेव और श्रीचंद सचदेव के नाम दर्ज हैं, जबकि शिकायत के विस्तृत विवरण में निर्मल सचदेव का उल्लेख है।
नामों में इस अंतर की पुलिस से पुष्टि की जानी चाहिए। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि इस तरह की नकल से उनके कारोबार और ब्रांड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।
2004 से पंजीकृत है सूर्यवंश ट्रेडमार्क
शिकायतकर्ता मनीष शादीजा के अनुसार, वह रामसागरपारा स्थित मनीष आटा चक्की के माध्यम से आटा और बेसन सहित खाद्य उत्पादों का कारोबार करते हैं। उनकी संस्था वर्ष 2004 से ‘सूर्यवंश’ ब्रांड नाम से बेसन और फरसान से जुड़े उत्पाद बेच रही है।
शिकायत में ट्रेडमार्क पंजीयन और पंजीयन की तारीख 21 जुलाई 2004 बताई गई है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, ट्रेडमार्क की वैधता 21 जुलाई 2034 तक है।
उनका दावा है कि दो दशक से अधिक समय में ब्रांड ने बाजार में अपनी पहचान बनाई है। शिकायत के अनुसार, इसी पहचान का लाभ उठाने के लिए मिलते-जुलते नाम और लगभग समान पैकेजिंग का इस्तेमाल किया गया।
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नाम से लेकर पैकेट की डिजाइन तक नकल का आरोप
मेसर्स एमएस सिंध बेसन के संचालक धीरज सचदेव ने ‘सूर्यवंशी’ नाम से उत्पाद बेचना शुरू किया। आरोप है कि पैकेट का रंग, सूर्य का चिह्न, उत्पाद की तस्वीर और ‘शहर गृहणियों की पहली पसंद’ जैसी टैगलाइन भी उनके ब्रांड से मिलती-जुलती रखी गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दोनों उत्पादों के पैकेट एक साथ देखने पर सामान्य ग्राहक के लिए अंतर पहचानना मुश्किल हो सकता है।
माना कैंप और तेलीबांधा में उत्पादन-भंडारण का दावा
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संबंधित उत्पाद का उत्पादन और भंडारण रायपुर के तेलीबांधा क्षेत्र के रविग्राम और माना कैंप स्थित डी-62, जय सदाराम मार्केट में किया जा रहा था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके ब्रांड की बाजार में बनी पहचान का फायदा उठाकर मिलते-जुलते नाम से उत्पाद बेचा जा रहा है।
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