आनंद जैन, इंदौर। निवेश के लिए कुछ बेसिक सूत्र कहे जा सकते हैं, हर निवेशक को इन्हें ध्यान रखते हुए निवेश की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। पहले तो अपने निवेश के लक्ष्य को तय करें। शार्ट टर्म और मिड टर्म और लांग टर्म में आपके लक्ष्य क्या होंगे। इसके बाद अपनी जोखिम क्षमता आंके।
इसके आधार पर असेट अलोकेशन और डायवर्सिफिकेशन करें। यानी अपने लक्ष्य और जोखिम के लिहाज से बेहतर प्लान, योजना, माध्यम चुनें और उनमें भी विविधतापूर्ण मिश्रण करते हुए बांटकर अपनी पूंजी को निवेश करें।
बाद के दौर में आप अपने निवेश की खरीद बिक्री को प्रदर्शन का आकलन कर तय करें। यानी कब आपकों मुनाफा काटना है और कब आपकों और निवेश करना है इसके लिए समय समय पर समीक्षा कर कदम बढ़ाते रहे।
निवेश के माध्यमों में लगने वाली फीस और कमीशन का भी पहले ही हिसाब लगा लें। साथ में किस माध्यम में कितनी अस्थिरता है इस बात को पहले से समझें। ऐसा ना हो कि आप अपनी जोखिम क्षमता से आगे जाते हुए बहुत ही ज्यादा अस्थिर माध्यम को चुन लें या कम जोखिम लेते हुए आप अपने लक्ष्य से पिछड़ जाएं।
याद रखें कि भले ही आप पेशेवर की सलाह लेकर निवेश की योजना बनाएं, लेकिन अपने निवेश के लिए खुद भी जागरूक होना जरूरी है। लिहाजा समय समय पर अपने निवेश की स्थिति व रिटर्न के प्रदर्शन को खुद देंखे। यदि कोई कमी है तो उस पर चर्चा करें व आवश्यक कदम उठाते हुए सुधार करें।
(आनंद जैन इंदौर में चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।)