Cheque Bounce Case: 4.55 लाख रुपये का चेक हुआ बाउंस, महिला को एक महीने की सजा
चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने सुनाई सजा। – प्रतीकात्मक तस्वीरHighLights
- क्रिप्टो कॉइन के जरिए जमीन में निवेश का प्रस्ताव दिया था
- हर महीने 10 प्रतिशत ब्याज देने का भरोसा दिलाया गया था
- नया रायपुर में करीब ढाई डिसमिल जमीन का वादा किया था
, बिलासपुर। क्रिप्टो करेंसी और जमीन में निवेश का भरोसा देकर 4.55 लाख रुपये लेने के बाद दिया गया चेक बैंक से अनादरित होने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु. गीतांजली कश्यप की अदालत ने आरोपी मौमिता सामान्ता को दोषी ठहराया है।
अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के तहत उसे एक माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही परिवादिनी सुमिता पॉल को 9 लाख 10 हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में देने का आदेश दिया है। राशि जमा नहीं करने पर आरोपी को 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
परिवादिनी सुमिता पॉल, निवासी अन्नपूर्णा कॉलोनी, बिलासपुर ने अदालत में परिवाद दायर कर बताया था कि मौमिता सामान्ता ने अपनी कंपनी ‘एमब्रोड एवन मार्केटिंग प्रा.लि.’ के माध्यम से क्रिप्टो कॉइन के जरिए जमीन में निवेश का प्रस्ताव दिया था। इसके बदले नया रायपुर में करीब ढाई डिसमिल जमीन देने अथवा हर महीने 10 प्रतिशत ब्याज देने का भरोसा दिलाया गया था।
इस प्रस्ताव पर सुमिता ने आरटीजीएस, बैंक हस्तांतरण और नकद के माध्यम से कुल 4 लाख 55 हजार रुपये दिए। आरोप के अनुसार, न तो उन्हें जमीन मिली और न ही निवेश की रकम वापस हुई। रकम की मांग करने पर 27 अक्टूबर 2022 को इकरारनामा बनाकर मौमिता ने आईसीआईसीआई बैंक, व्यापार विहार शाखा का 4 लाख 55 हजार रुपये का चेक (क्रमांक 000027) दिया।
बैंक में चेक लगाने पर हुआ अनादरित
सुमिता ने चेक भुगतान के लिए बैंक में लगाया तो खाते में पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण वह ‘नो अवेलेबल बैलेंस’ की टिप्पणी के साथ अनादरित हो गया। इसके बाद परिवादिनी ने अधिवक्ता के माध्यम से 20 दिसंबर 2022 को पंजीकृत डाक से भुगतान की मांग का नोटिस भेजा। नोटिस आरोपी द्वारा प्राप्त नहीं किए जाने के कारण बिना तामील के वापस लौट आया। निर्धारित समय में भुगतान नहीं होने पर 23 जनवरी 2023 को अदालत में परिवाद दायर किया गया।
हस्ताक्षर से बनी कानूनी धारणा खंडित नहीं कर सकी आरोपी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि चेक पर आरोपी के हस्ताक्षर होने के कारण कानून के तहत यह धारणा बनती है कि चेक किसी वैध देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था। आरोपी इस कानूनी धारणा को खंडित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सकी।
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अदालत ने मांग नोटिस और निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने से जुड़े आवश्यक तथ्यों को भी प्रमाणित माना। इसी आधार पर अदालत ने मौमिता सामान्ता को दोषी ठहराते हुए एक माह के साधारण कारावास और 9.10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने की सजा सुनाई।
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