छत्तीसगढ़ में PM आवास के पुराने आंकड़ों पर सियासत, सत्यापन में दो लाख अपात्र मिले
छत्तीसगढ़ में PM आवास के पुराने आंकड़ों पर सियासत। (फाइल फोटो)HighLights
- 2011 सर्वे में करीब 18.75 लाख हितग्राही पात्र पाए गए थे।
- 2018 सर्वे में 8.19 लाख नए नाम जुड़े थे।
- सत्यापन में करीब दो लाख हितग्राही अपात्र पाए गए
राज्य ब्यूरो, , रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर एक बार सियासी गलियारों में छिड़ी बहस के बीच अब तक के वास्तविक आंकड़ों, सर्वे रिपोर्ट और प्रशासनिक स्वीकृतियों की एक तस्वीर सामने है। पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकारों के दावों-प्रतिदावों के बीच राज्य में पीएम आवास के सफर को समझना जरूरी हो जाता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कागजों से लेकर धरातल तक योजना किस प्रकार आगे बढ़ी है।
पात्रता तय करने के लिए हुए दो मुख्य सर्वे
- राज्य में पात्रता तय करने के लिए दो मुख्य सर्वे हुए। वर्ष 2011 के सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना सर्वे में लगभग 18 लाख 75 हजार लोग पात्र पाए गए थे, जबकि 2018 के सर्वे में लगभग आठ लाख 19 हजार नए नाम जुड़े। इस तरह कुल पात्र हितग्राहियों का आंकड़ा करीब 26 लाख 95 हजार तक पहुंच गया। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल की बात करें तो, भाजपा की डॉ. रमन सिंह सरकार के समय लगभग छह लाख आवास स्वीकृत हुए।
18 लाख 12 हजार आवासों का संकल्प और मैदानी सत्यापन
- सत्ता में आने के बाद विष्णु देव साय सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट में ही 18 लाख 12 हजार आवासों की राशि जारी करने की प्रक्रिया को गति दी। इस आंकड़े में 2018 के सर्वे के 8.19 लाख, 2011 सर्वे के 6.99 लाख, पुरानी अपूर्ण स्वीकृतियों के 2.46 लाख और मुख्यमंत्री आवास योजना के 46 हजार आवास शामिल थे। इन आंकड़ों को केंद्र सरकार को भेजकर स्वीकृतियां सुनिश्चित कराई गईं।
नए सर्वे और सितंबर 2023 के दावों की सच्चाई
- हाल ही में 11 सितंबर को आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री द्वारा छत्तीसगढ़ को तीन लाख 65 हजार नए आवासों का लक्ष्य दिया गया है। जानकारों के अनुसार, यह नया लक्ष्य 2024 में कराए गए बिल्कुल नए सर्वे पर आधारित है। इसका 2011 या 2018 के पुराने आंकड़ों से कोई ताल्लुक नहीं है।
- दूसरी ओर, सितंबर 2023 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा ”ग्रामीण आवास न्याय योजना” और ”मुख्यमंत्री आवास योजना” जैसी राज्य प्रवर्तित योजनाएं लाई गई थीं। उस समय चुनावी बेला में लगभग सात लाख लोगों को राशि जारी करने के दावे किए गए, लेकिन धरातल पर केवल 84 हजार हितग्राहियों के खातों में ही पैसे पहुंच पाए थे कि आचार संहिता लागू हो गई। इसी तरह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पात्र 46 हजार लोगों को भी चुनाव से पहले राशि जारी नहीं हो पाई थी, जिससे स्वीकृतियों और वास्तविक वितरण के बीच बड़ा अंतर रह गया था।
यह भी पढ़ें- पर्यटकों को मिलेगा असली छत्तीसगढ़ी स्वाद, जशपुर के 6 गांवों में 1.80 करोड़ की लागत से विकसित होगा क्लस्टर होमस्टे मॉडल
Leave a Reply